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ऑटो कंपनियों ने किया कर्मचारियों को VRS देने का एलान, मंदी से जूझ रहे सेक्टर को नहीं मिल रही राहत

Fri, 04 Oct 2019 12:59 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 04 Oct 2019 12:59 PM IST
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Slow down Impact on Auto Sector, toyota kirloskar motor announced for voluntary retirement scheme
Car Plant and Factory - फोटो : सांकेतिक

बीता सितंबर महीना भी ऑटो सेक्टर के लिए राहत भरा नहीं रहा है। वहीं अब टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने अपने स्थाई कर्मियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए बोल दिया है। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि त्योहारी सीजन में ऑटो सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री में उछाल आएगा, लेकिन प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

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चार कंपनियों ने किया एलान

खबरों के मुताबिक जापान की टोयोटा मोटर कापोर्रेशन की भारतीय सब्सिडियरी कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर मोटर चौथी ऐसा कंपनी बन गई है जिसने अपने कर्मचारियो के लिए वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना शुरू की है। इससे पहले जनरल मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प, अशोक लेलैंड ने दो महीने पहले वीआरएस शुरू करने के एलान किया था।

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स्थाई कर्मचारियों को दिया ऑफर

मिरर नाऊ की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने पिछले 23 अक्टूबर को यह स्कीम लॉन्च की थी, जो 22 अक्टूबर, 2019 को शुरू हुई थी। इस स्कीम में उन लोगों को शामिल किया गया है, जो स्थाई कर्मचारी हैं और कंपनी में पांच साल से ज्यादा काम करने के अनुभव है। हालांकि कंपनी ने अस्थाई कर्मचारियों के लिए अभी तक कोई स्कीम नहीं लॉन्च की है, कंपनी का कहना है कि उनके कॉन्ट्रैक्ट का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।

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ऑपरेशन कॉस्ट में आएगी कमी

इससे पहले अशोक लेलैंड ने भी अगस्त में अपने कर्मचारियों के लिए ऐसी ही स्कीम लॉन्च की थी और गाड़ियों के उत्पादन में कटौती भी की थी। जिसके बाद दो पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने घाटे को पूरा करने के लिए सितंबर में अपने कर्मचारियों के लिए वीआरएस स्कीम लॉन्च की थी। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां मुख्य रूप से कर्मचारियों के लिए इस तरह की योजनाएं इसलिए लाती हैं, ताकि ऑपरेशन कॉस्ट में कमी आए और उनका लाभ बढ़े।

कंपनी-कर्मचारी दोनों के लिए फायदेमंद

वहीं वीआरएस स्कीम नियोक्ताओं के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए काफी लाभदायक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी को बाहर करने की बजाय यह स्कीम ज्यादा हितकर है। ऐसे कदम उठाने से कंपनियां न केवल कर्मचारी की अहमियत प्रदर्शित करती हैं, बल्कि कर्मचारियों की लागत कम करने की भी कोशिश करती हैं। ताकि कम वाहन बिक्री के कारण अपनी ऑपरेशनल कॉस्ट और मार्जिन को संतुलित कर सकें।



इस साल के शुरुआती छह महीनों में टोयोटा किर्लोस्कर के उत्पादन में 37 फीसदी, हीरो मोटोकॉर्प के उत्पादन में 36 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा अप्रैल से सितंबर 2019 के बीच अशोक लेलैंड ने  उत्पादन में 18 फीसदी की कटौती की है।

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