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संजय गांधी और मारुति की ये कहानी, कुछ ऐसे हुई शुरू
Fri, 14 Dec 2018 04:35 PM IST
भावना चौधरी
आॅटो डेस्क, अमर उजाला
आॅटो डेस्क, अमर उजाला
Published by: भावना चौधरी
Updated Fri, 14 Dec 2018 04:35 PM IST
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sanjay gandhi with maruti car
मारुति आज देश की जानी मानी कंपनियों में से एक है। मारुति की कार आॅल्टो सालों से लोगों के बीच अपनी जगह बनाए हुए है। लेकिन क्या आप जानते है कि मारुति की नींव गांधी परिवार ने रखी थी। सबसे पहले सन् 1971 में कंपनी एक्ट के अंतर्गत मारुति लिमिटेड का गठन किया गया।
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sanjay gandhi
जिसके पहले एमडी संजय गांधी बने। वह दौर ऐसा था कि संजय गांधी को इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। अपनी लाख कोशिशो के बावजूद संजय गांधी इस कंपनी को नहीं संभाल पाए और लगातार इसे नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद सन् 1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद मारुति लिमिटेड को जापान की सुजुकी का साथ मिला।
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New Maruti Alto 800
जिसके बाद सबसे पहले मारुति 800 के उत्पादन पर काम किया गया। 14 दिसंबर 1983 को भारत में पहली बार मारुति की कार ने एंट्री की। जिसकी चाबी उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हरपाल सिंह को सौपी।
sanjay gandhi
हालांकि कुछ लोग आज भी इसका श्रेय उन्हें नहीं देना चाहते ।जिस पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और आँध्र प्रदेश के राज्यपाल रह चुके नारायण दत्त तिवारी कहते कहा करते थे कि उन्होंने वर्कशॉप में मारुति का डिज़ाइन बनाने की कोशिश की थी। मारुति कार भारत में बन रही है और उसका निर्यात भी किया जा रहा है, लेकिन इसकी नींव संजय गाँधी ने ही डाली थी।