दिल्ली मेट्रो कार्ड की तरह जारी हो Fastag, मंत्रालय की रिजर्व बैंक से KYC से मुक्ति देने की गुजारिश!
इस महीने 15 दिसंबर से पूरे देश के कई टोल प्लाजा पर कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए फास्टैग (Fastag) व्यवस्था लागू होने जा रही है। लेकिन इससे पहले ही सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से गुहार लगाई है कि फास्टैग्स के लिए केवाईसी प्रक्रिया से छूट दी जाए।
दस्तावेजों से मिले मुक्ति
मंत्रालय ने आरबीआई से कहा कि फास्टैग्स खरीदने वाले ग्राहकों को Know Your customer यानी केवाईसी जैसे अनिवार्य नियमों से छूट दी जाए, ताकि लोग नजदीकी टोल गेट्स से भी तत्काल फास्टैग्स खरीद सकें। मौजूदा नियमों के मुताबिक वाहन मालिक को वाहन की डिटेल्स देने के साथ संबंधित दस्तावेजों और व्यक्तिगत पहचान और पते से संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होते हैं।
चुकानी पड़ती है दोगुनी रकम
इस प्रक्रिया में पांच से 10 मिनट तक लग जाते हैं। वहीं नियमों के मुताबिक फास्टैग जारी होने के एक साल के भीतर केवाईसी कराना जरूरी है। गौरतलब है कि प्रत्येक एक केवाईसी कराने पर तकरीबन 300 रुपये का खर्च आता है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस मुद्दे को आरबीआई गर्वनर शशिकांत दास के सामने उठाया था। गडकरी का कहना था कि बैंकों और NHAI टोलगेट्स के नजदीक खास फास्टैग लेन पर ही वाहनों को टैग जारी करने चाहिए, ताकि लोगों को फीस के तौर पर दोगुनी रकम न चुकानी पड़े।
बैंक पहले ही कर चुके होते हैं केवाईसी
मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया के तहत यूजर को एक वॉलेट बनाने पड़ता है और उसे संबंधित बैंक या क्रेडिट कार्ड से लिंक करना पड़ता है, जिसके बाद उसे रिचार्ज किया जा सकता है। जबकि बैंक पहले ही ग्राहकों के बैंक अकाउंट्स और क्रेडिट कार्ड्स का केवाईसी कर चुके होते हैं, ऐसे में फिर से केवाईसी की कोई जरूरत नहीं है।
मेट्रो में है ये सिस्टम
उनका कहना है कि क्लोज्ड लूप पेमेंट सिस्टम इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, और दिल्ली मेट्रो कार्ड्स में इसका इस्तेमाल होता है। इसमें किसी प्रकार के केवाईसी की जरूरत नहीं पड़ती। सरकार का कहना है कि 15 दिसंबर से फास्टैग व्यवस्था लागू होने से पहले अभी तक 80 लाख टैग्स बांटे जा चुके हैं।
इन सर्विसेज पर हो जरूरी
वहीं मंत्रालय का यह भी कहना है कि सरकार भविष्य में पार्किंग, पेट्रोल पंपों और अन्य सर्विसेज को फास्टैग्स के जरिये भुगतान शुरू करने की योजना बना रही है और राज्य सरकारों की तरफ से संचालित टोल रोड्स को भी फास्टैग्स के तहत लाया जाएगा, ऐसे में सेमी-ओपन लूप पेमेंट सिस्टम को अपनाया जा सकता है।