आजकल युवाओं में मॉडिफिकेशन को लेकर जबरदस्त क्रेज है। मॉडिफिकेशन का सीधा मतलब अपने वाहन को एक नया रुप देने से है। फिर चाहे बात कार की हो या बाइक की। बाजार में मॉडिफिकेशन के लिए पसंदीदा बाइकों में एनफील्ड नंबर वन पर रहती है। इसके अलावा पल्सर और राजदूत को मॉडिफाई कराना सबसे आसान काम है। मॉडिफिकेशन का शौक अब कार मालिकों के भी सिर चढ़कर बोल रहा है। जिसमें स्विफ्ट, पुंटो से लेकर थार जैसी गाड़ियां शामिल हैं। गाड़ियों का मॉडिफिकेशन सबसे पहले शुरू होता है उनके व्हील से । आज आपको बताते हैं कि बाइक को मॉडिफाई कराने से पहले किन किन चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।
एग्जॉस्ट (साइलेंसर) से छेड़छाड़
बहुत से लोग बाइक का एक्जॉस्ट बदलवाकर अपनी बाइक की आवाज को धुआंधार बनाना चाहते हैं, लेकिन वो भूल जाते हैं कि ऐसा करके आप न सिर्फ लोगों का परेशान करते हैं, बल्कि कंपनियां आपकी बाइक की वारंटी भी खत्म कर देती है। इसलिए ध्यान रहे अपनी बाइक के एक्जॉस्ट से अगर आपने छेड़छाड़ की तो फिर कंपनी आपको कोई भी वारंटी नहीं देगी। हालांकि यह बात बहुत से मॉडिफिकेशन वाले पहले ही बता देते हैं लेकिन जहां बात पैसे कमाने की आती है वहां सब जायज हो जाता है।
व्हील को बदलवाना
बाइक मॉडिफाई हो और टायर से छेड़छाड़ न हो यह मुमकिन नहीं। कुछ शौकिन लोग अपनी बाइक में मोटे चौड़े टायर लगवा लेते हैं। यदि आप इंजन क्षमता से ज्यादा भारी टायर अपनी बाइक में लगाएंगे तो बाइक परफॉर्मेंस ठीक उसी तरह से प्रभावित होगा जैसे 200 किलो वजन उठाना आपके लिए मुश्किल होता है।
ग्राफिक्स के साथ मन भर कर लें मनमानी
बाइक में मॅाडीफिकेशन करवाकर वारंटी जाने का डर अगर आपको भी सताता है तो आपके लिए बेहतर सुझाव है वह यह कि आप अपनी बाइक पर ग्राफिक्स के साथ खेलें और अपनी बाइक को अलग अंदाज दें। यह बहुत सेफ है और इससे बाइक की कोई वारंटी भी नहीं जाती। लेकिन ध्यान रहे उन्हीं ग्राफिक्स के तरीकों का प्रयोग करें जिससे बाइक का कलर न उड़े।
इंजन को न छुएं
मॅाडीफिकेशन में मोडीफाई करने वाली कंपनियां गाड़ी के इंजन के साथ भी छेडछाड़ करती हैं। इससे सिर्फ वारंटी ही नहीं बल्कि इंजन की लाइफ भी चली जाती है। एक बार जहां इंजन खोलकर उसके इंजेक्शन सिस्टम से छेड़छाड़ किया। तो बाइक का माइलेज भी पूरी तरह से प्रभावित होता है।