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'दशक का सबसे खराब त्योहारी सीजन': भारतीय ऑटो सेक्टर के संकट के 5 बड़े कारण
Wed, 03 Nov 2021 02:32 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 03 Nov 2021 02:32 PM IST
सार
वाहन उद्योग के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने हाल ही में इस बात पर रोशनी डाली कि त्योहार का सीजन कितना प्रतिकूल रहा है। यहां हम आपको बता रहे हैं वो 5 वजहें जो इस समय भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री पर सबसे ज्यादा असर डाल रहे हैं।
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विस्तार
देश भर में गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और अन्य त्योहारों से लेकर धनतेरस और दिवाली तक की अवधि का मतलब आमतौर पर भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए बढ़िया कारोबार का होता है। कैलेंडर वर्ष के लिए बिक्री अपने शबाब पर होती है और नए लॉन्च ग्राहकों का सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित कर बिक्री को बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि, यह साल यादगार नहीं रहा क्योंकि कई वजहों ने उद्योग, खास तौर पर यात्री वाहन सेगमेंट को एक बड़ा झटका दिया है।
वाहन उद्योग के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने हाल ही में इस बात पर रोशनी डाली कि त्योहार का सीजन कितना प्रतिकूल रहा है। एक दशक में बिक्री के प्रदर्शन के मामले में इसे सबसे खराब त्योहारी सीजन बताते हुए, FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया कि क्यों वर्तमान समय अच्छा नहीं रहा है। यहां हम आपको बता रहे हैं वो 5 वजहें जो इस समय भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री पर सबसे ज्यादा असर डाल रहे हैं।
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वाहन उद्योग के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने हाल ही में इस बात पर रोशनी डाली कि त्योहार का सीजन कितना प्रतिकूल रहा है। एक दशक में बिक्री के प्रदर्शन के मामले में इसे सबसे खराब त्योहारी सीजन बताते हुए, FADA के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया कि क्यों वर्तमान समय अच्छा नहीं रहा है। यहां हम आपको बता रहे हैं वो 5 वजहें जो इस समय भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री पर सबसे ज्यादा असर डाल रहे हैं।
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1. सेमीकंडक्टर चिप की कमी
विश्व में सेमीकंडक्टर चिप की कमी का भारत और दुनिया भर में लगभग हर प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता के उत्पादन चक्र पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। उत्पादन चक्रों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है जिसके कारण आपूर्ति से संबंधित मुद्दों और डिलीवरी का वेटिंग पीरियड काफी बढ़ गया है। कई मामलों में, डिलीवरी में देरी के कारण बुकिंग रद्द कर दी गई है। इससे जाहिर तौर पर बिक्री के आंकड़ों पर बुरा असर पड़ता है। और वैश्विक समस्या का कोई समाधान न होने के कारण, आगे का रास्ता अंधकारमय बना हुआ है।
विश्व में सेमीकंडक्टर चिप की कमी का भारत और दुनिया भर में लगभग हर प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता के उत्पादन चक्र पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। उत्पादन चक्रों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है जिसके कारण आपूर्ति से संबंधित मुद्दों और डिलीवरी का वेटिंग पीरियड काफी बढ़ गया है। कई मामलों में, डिलीवरी में देरी के कारण बुकिंग रद्द कर दी गई है। इससे जाहिर तौर पर बिक्री के आंकड़ों पर बुरा असर पड़ता है। और वैश्विक समस्या का कोई समाधान न होने के कारण, आगे का रास्ता अंधकारमय बना हुआ है।
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2. कारों का महंगा होना
कुछ सामग्रियों की बढ़ती लागत के कारण कई कंपनियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। और सबसे खराब स्थिति यह है कि कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ भी ग्राहकों पर डाला गया है। त्योहारी सीजन से पहले या उसके दौरान कीमतों में बढ़ोतरी, वाहन खरीदने के इच्छुक ग्राहक पर बुरा असर डालती है और इसका बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।
कुछ सामग्रियों की बढ़ती लागत के कारण कई कंपनियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। और सबसे खराब स्थिति यह है कि कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ भी ग्राहकों पर डाला गया है। त्योहारी सीजन से पहले या उसके दौरान कीमतों में बढ़ोतरी, वाहन खरीदने के इच्छुक ग्राहक पर बुरा असर डालती है और इसका बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।
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3. कोरोना काल में पैसों की बचत
भारत में कोविड-19 संक्रमण के मामले भले ही कम हो रहे हों। लेकिन गुलाटी ने कहा कि छोटे वाहनों की मांग अभी भी उम्मीद से कम है। क्योंकि लोग स्वास्थ्य संबंधी कारणों से धन को बचाना जारी रख सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक अनिश्चितताओं का मतलब यह हो सकता है कि ज्यादा मूल्य की खरीदारी फिलहाल के लिए बंद की जा रही है। हालांकि OEM (ओरिजिनल इक्यूपमेंट मैन्युफेक्चरों) अभी भी यह कह रहे हैं कि मांग मजबूत बनी हुई है लेकिन चिप की कमी के कारण आपूर्ति चिंता का विषय है।
भारत में कोविड-19 संक्रमण के मामले भले ही कम हो रहे हों। लेकिन गुलाटी ने कहा कि छोटे वाहनों की मांग अभी भी उम्मीद से कम है। क्योंकि लोग स्वास्थ्य संबंधी कारणों से धन को बचाना जारी रख सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक अनिश्चितताओं का मतलब यह हो सकता है कि ज्यादा मूल्य की खरीदारी फिलहाल के लिए बंद की जा रही है। हालांकि OEM (ओरिजिनल इक्यूपमेंट मैन्युफेक्चरों) अभी भी यह कह रहे हैं कि मांग मजबूत बनी हुई है लेकिन चिप की कमी के कारण आपूर्ति चिंता का विषय है।
Second Hand Car
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4. तेल की बढ़ती कीमतें
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर नए वाहनों की मांग पर पड़ सकता है। पेट्रोल अब 110 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा महंगी हो गई है और डीजल की कीमत भी 100 रुपये के पार पहुंच गई है। हाल के महीनों में वाहन चलाने या सवारी करने की लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यहां इस बात पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि कोरोना काल में आवाजाही के लिए निजी वाहनों की मांग, अभी भी सेकंड हैंड वाहनों की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी का कारण हो सकती है। निजी वाहन होने के साथ ही पैसों की बचत करना एक संतुलन बनाता है, और इसमें शायद सेकंड हैंड कार बाजार ने ग्राहकों को कुछ राहत दी है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर नए वाहनों की मांग पर पड़ सकता है। पेट्रोल अब 110 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा महंगी हो गई है और डीजल की कीमत भी 100 रुपये के पार पहुंच गई है। हाल के महीनों में वाहन चलाने या सवारी करने की लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यहां इस बात पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि कोरोना काल में आवाजाही के लिए निजी वाहनों की मांग, अभी भी सेकंड हैंड वाहनों की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी का कारण हो सकती है। निजी वाहन होने के साथ ही पैसों की बचत करना एक संतुलन बनाता है, और इसमें शायद सेकंड हैंड कार बाजार ने ग्राहकों को कुछ राहत दी है।
Maruti Suzuki Swift Facelift 2021
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5. कम लॉन्च
पिछले वर्षों की तुलना में मास-मार्केट सेगमेंट में कम लॉन्च, खरीदार भावनाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी, साल 2021 की शुरुआत में सिर्फ एक फेसलिफ्ट मॉडल लाई और अब लॉन्च के लिए एक और अपडेट मॉडल तैयार कर रही है। 'किफायती' कीमत सेगमेंट के अन्य प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां भी तुलनात्मक रूप से शांत ही रही हैं।
पिछले वर्षों की तुलना में मास-मार्केट सेगमेंट में कम लॉन्च, खरीदार भावनाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी, साल 2021 की शुरुआत में सिर्फ एक फेसलिफ्ट मॉडल लाई और अब लॉन्च के लिए एक और अपडेट मॉडल तैयार कर रही है। 'किफायती' कीमत सेगमेंट के अन्य प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां भी तुलनात्मक रूप से शांत ही रही हैं।