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Highway Accidents: बंगलूरू-मैसूरु एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की संख्या में आई कमी, पुलिस ने उठाए ये अहम कदम
Tue, 18 Jun 2024 03:14 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 18 Jun 2024 03:14 PM IST
सार
बंगलूरू-मैसूरू एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की संख्या में नाटकीय रूप से कमी आई है, जिसे पहले "डेथ हाईवे" के नाम से जाना जाता था। यह पुलिस द्वारा उठाए कड़े सुरक्षा उपायों का नतीजा है।
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National Highway in Karnataka
- फोटो : X@nitin_gadkari
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विस्तार
बंगलूरू-मैसूरू एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की संख्या में नाटकीय रूप से कमी आई है, जिसे पहले "डेथ हाईवे" के नाम से जाना जाता था। यह कमी यात्रियों के लिए राहत की सांस है और यह पुलिस विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा लागू किए गए कड़े सुरक्षा उपायों का नतीजा है।
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बंगलूरू और मैसूरू को जोड़ने वाला कुख्यात NH 275 एक्सप्रेसवे लंबे समय से दुर्घटनाओं की बढ़ी हुई संख्या के लिए जाना जाने लगा था। जिसने पूरे कर्नाटक में बड़े स्तर पर चिंता पैदा कर दी थी। इन घटनाओं की वजह से हाईवे की अराजक स्थिति के संबंध में मंत्रियों, स्थानीय प्रतिनिधियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बीच कई स्तर की चर्चाएं भी हुईं।
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इन चिंताओं पर कार्रवाई करते हुए, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) अलोक कुमार ने पुलिस और राजमार्ग अधिकारियों के साथ मिलकर दुर्घटनाओं में योगदान करने वाले कई वजहों को ढूंढ निकाला। बाद में उनके द्वारा लक्षित सुरक्षा उपायों को लागू करने से सकारात्मक नतीजे मिले हैं।
जनवरी से मई 2023 तक, बंगलूरू-मैसूरू राष्ट्रीय राजमार्ग पर 288 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 100 मौतें और 301 लोग घायल हुए। इसके ठीक उलट, 2024 में इसी अवधि में सिर्फ 125 दुर्घटनाएं, 31 मौतें और 167 घायल हुए, जो एक महत्वपूर्ण कमी को दर्शाता है।
इस सुधार की चाबी बंगलूरू-निडागत्त और निडागत्त-मैसूर दोनों हिस्सों पर पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निगरानी कैमरों को रणनीतिक तौर पर लगाना रहा है। ये कैमरे रामनगर और मांड्या जिला पुलिस विभागों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। प्रत्येक जिले के पुलिस नियंत्रण कक्ष में अब सर्वर हैं जो यातायात नियमों के उल्लंघन को सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड करते हैं। जिससे तेज प्रतिक्रिया और यातायात कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होता है।