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ज्योतिष: क्या होता है जब कुंडली में बनता है विषपुरुष और विषकन्या योग

Sun, 17 Jan 2021 12:49 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 17 Jan 2021 12:49 PM IST
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what is vish yog according to astrology impact of on kundli
कुंडली में विष योग - फोटो : अमर उजाला

विषपुरुष योग

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बदलते सामाजिक समीकरण में शादी-विवाह के समय वर-कन्या की जन्मकुंडली मिलान में सभी दोषों के साथ साथ दोनों की जन्मकुंडली में विषपुरुष योग का गहनता से विचार करना चाहिए। कुंडली विवेचन के समय अक्सर देखने में आया है कि शादी के कुछ ही दिनों में दोनों परिवारों में कोई न कोई बड़ी घटना हो जाती है अथवा पति-पत्नी एक दूसरे के लिए शत्रु बन जाते हैं। पति अपनी पत्नी के साथ क्रूरता का व्यवहार करता है परिणाम यह होता है कि दोनों ही अलग-अलग रहने लगते हैं और उनके माँ-बाप का तनाव बढ़ जाता है।

इस तरह के हालात पैदा न हों इसलिए विवाह से पूर्व ही पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से दोनों की कुंडलियों का फलादेश ज्ञात करना चाहिए। वैदिक ज्योतिष में तिथि, वार तथा ग्रह-नक्षत्रों के संयोगों से निर्मित होने वाले अशुभ योगों में विधुरयोग, क्रूर पतियोग और पत्नीहंता आदि जैसे अति अशुभ योग हैं। इस योग का दुष्प्रभाव भी इसके नाम के अनुरूप ही रहता है।
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विषकन्या योग
किसी भी पुरुष की जन्मकुंडली में विषकन्या योग बना हो तो विवाह के समय इसकी भी गहनता से जांच कराकर उपाय करा लेना चाहिए अन्यथा दाम्पत्य जीवन में हानि तय रहती है। इनमें भद्रा तिथियों, 'द्वितीया, सप्तमी' एवं द्वादशी तिथियों में जन्म लेने वाली कन्याओं का विचार अवश्य करना चाहिए। किसी भी कन्या के जन्म के समय यदि रविवार का दिन हो, द्वितीया तिथि पड़ रही हो और आश्लेषा या शतभिषा नक्षत्र हों तो इन योगों के मध्य जन्म लेने वाली कन्या को 'विषकन्या योग' में जन्मीं माना गया है। इसी प्रकार यदि कन्या के जन्म के समय द्वादशी तिथि हो, रविवार का दिन हो, कृतिका, विशाखा अथवा शतभिषा नक्षत्र हों तो भी 'विषकन्या योग' बनता है।
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अन्य संयोगों जैसे सप्तमी तिथि हो मंगलवार का दिन हो, आश्लेषा,  या विशाखा नक्षत्र हों तब भी कुंडली में 'विषकन्या योग' बनता है। सप्तमी या द्वादशी तिथि हो, शनिवार का दिन हो और कृतिका नक्षत्र हो तो इस योग में जन्म लेने वाली कन्या की कुंडली में भी 'विषकन्या' बनता है। शतभिषा नक्षत्र हो, मंगलवार का दिन हो द्वादशी तिथि हो तो इस योग में भी जन्म लेने वाली कन्यायें भी विषकन्या योग वाली होती है। उपरोक्त बताये गए योगों में जन्मी कन्याएं पति के लिए तो कष्टकारक होती ही है साथ ही ससुराल के अन्य सदस्यों के लिए भी अशुभ होती है। इसलिए इसतरह के योगों की जाँच कराकर उसकी शान्ति कराएं और पश्च्यात विवाह कार्य संपन्न करें तो दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा।

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