23 अक्तूबर को शुक्र गोचर से बुध संग बनेगा शुभ संयोग, इनको मिलेगा लाभ
शुक्र 23 अक्टूबर को दिन के 10 बजकर 42 अपने परममित्र बुध की राशि में प्रवेश कर रहे हैं जहां ये 16 नवंबर की मध्यरात्रि 01 बजे तक गोचर करेंगे उसके बाद तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे।
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अति प्रभावशाली ग्रह शुक्र 23 अक्टूबर को दिन के 10 बजकर 42 अपने परममित्र बुध की राशि में प्रवेश कर रहे हैं जहां ये 16 नवंबर की मध्यरात्रि 01 बजे तक गोचर करेंगे उसके बाद तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। वर्तमान समय में बुध भी अपने परममित्र शुक्र की राशि में 22 सितंबर से गोचर कर रहे हैं इस प्रकार दोनों मित्र ग्रह एक दूसरे की राशि पर गोचर करते हुए 24 दिनों तक के लिए फलित ज्योतिष के अनुसार अद्भुत फल देने वाले 'अन्योन्याश्रित' योग का निर्माण करेंगे। यह योग दो ऐसे शुभ ग्रहों के साथ निर्मित होता है जो परम मित्र भी हों। बुध और शुक्र इस तुला पर बिलकुल खरे उतरते हैं क्योंकि ये दोनों ग्रह परम मित्र भी हैं और शुभग्रह भी हैं। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि ये योग हो तो वह इन ग्रहों से सम्बंधित क्षेत्रे तथा कारक पदार्थों में अच्छी ख्याति प्राप्त करते हुए कामयाब जीवन व्यतीत करता है।
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ज्योतिष शास्त्र में बुध
ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, ज्ञान, वाक्चातुर्यता, विवेक, त्वरित निर्णय लेने वाला, कानूनविद, न्याय कर्ता, तर्कशास्त्र, बैंकिग, शिक्षण, एकाउंटटेंट, लेखाधिकारी, मार्केटिंग के कार्य, हास्य-विनोद आदि का कारक माना जाता है। शुक्र को फिल्म उद्योग, सौंदर्य प्रतियोगिताओं में विजयदिलाने वाला, ऐश्वर्यपूर्ण जीवन, सामाजिक प्रतिष्ठा, दाम्पत्य सुख, विलासिता पूर्ण वस्तुओं, महंगी गाड़ियों, महंगी शराबों, पांच सितारा होटलों, सुगन्धित पदार्थों, भोग-विलास, औषधियों, रेशम के वस्त्रों, रासायनिक वस्तुओं, भारीउद्योगों, उत्तम स्वास्थ्य, गुप्त रोगों, न्युरोलोजिकल बीमारियों का कारक माना गया है।
अन्योन्याश्रित योग बनने से जातकों को लाभ
जिन जातकों की जन्मकुंडलियों ये योग 'त्रिकोण' से बनता है वे विद्वान धनी मानी, समाज में अति आदरणीय और धर्म कर्म में रूचि रखने वाले पुत्र-पौत्र आदि से संपन्न होते हैं। जिनकी जन्मकुंडली में यह योग केंद्र में निर्मित होता है वे उच्चपद प्राप्त करने वाले, नेतृत्व शक्ति से संपन्न, समाज में अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखने में पूर्ण सफल रहते हैं। बृषभ और मिथुन राशि के साथ-साथ कन्या तथा तुला राशि वालों के लिए भी यह योग अति शुभ फल दायक रहेगा क्योंकि इन्हीं राशियों के स्वामियों
द्वारा ये महान फलदायी अन्योन्याश्रित योग निर्मित हो रहा है।
अन्योन्याश्रित योग में कौन-कौन से शुभ कार्य
इन्हें कोई भी बड़े से बड़ा कार्य आरंभ करना हो, शिक्षा-प्रतियोगिता में शामिल होना हो, चुनाव से सम्बंधित अथवा सामाजिक पद-प्रतिष्ठा से सम्बंधित निर्णय लेना हो,अनुबंध पर हस्ताक्षर करना हो या विदेश यात्रा के लिए वीजा या नागरिकता का आवेदन करना हो तो यह योग अतिशुभ फल दायक सिद्ध होगा। अन्य राशियों के लिए भी इनका फल सामन्य किन्तु शुभ रहेगा।