Vaastu and Fengshui: जानिए आखिर कैसे हैं वास्तु और फेंगशुई एक समान
वास्तुशास्त्र और फेंगशुई में कई समानताएं हैं, ये दोनों शास्त्र सूर्य की किरणों एवं पृथ्वी पर बहनेवाली चुम्बकीय तरंगों पर आधारित हैं। चलिए जानते हैं वास्तुशास्त्र ओर फेंगशुई में क्या समानताएं हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वास्तु एवं फेंगशुई के सिद्धांतों में काफी अंतर है किंतु दोनों ही काफी प्रभावशाली हैं। फेंगशुई में पांचों तत्वों के संतुलन की बात की जाती है तथा संतुलन के लिए अनेक सांकेतिक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। वास्तु प्राचीन वैदिक विद्या है तथा इसमें पूरा जोर दिशाओं के अनुसार कमरे, रसोईघर, टॉइलेट आदि बनाने पर दिया जाता है। हालांकि इतना अंतर होने के बाद भी वास्तुशास्त्र और फेंगशुई में कई समानताएं हैं, ये दोनों शास्त्र सूर्य की किरणों एवं पृथ्वी पर बहनेवाली चुम्बकीय तरंगों पर आधारित हैं। चलिए जानते हैं वास्तुशास्त्र ओर फेंगशुई में क्या समानताएं हैं।
दोनों में होता है लाल रंग का प्रयोग
वास्तुशास्त्र कहता है कि मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, ॐ, शुभ-लाभ लिखने में भी लाल रंग का ही प्रयोग करना चाहिए क्योंकि यह शुभ माना जाता है। आपने अक्सर मंदिरों में भगवान की मूर्तियों को सिंदूर पर भी लाल रंग का प्रयोग देखा होगा। देवी को लाल चोला व चुनरिया पहनाई जाती है। वहीं फेंगशुई में घर के मुख्य द्वार पर लाल रंग के प्रयोग की सलाह दी जाती है। इसके पीछे कहा जाता है कि उस घर में रहने वाले लोगों की प्रसिद्धि बढ़ती है। चीन में भी भगवान को लाल कपड़ों से सजाया जाता है, लाल कागज व लाल रंग के बल्ब मंदिर में लगाए जाते हैं।
सफाई पर जोर
वास्तु शास्तु शास्त्र कहता है कि घर में गदंगी होने पर नकरात्मक ऊर्जा का वास होता है। ये बात तो फेंगशुई भी कहता है कि घर के अंदर कबाड़ रखना शुभ नहीं होता है और सफाई पर अत्यधिक जोर दिया जाता है।
फेंगशुई में प्लेसमेंट ऑफ फर्नीचर के बारे में विस्तार से बताया गया है और वास्तुशास्त्र में सही स्थान पर दरवाजा रखने से प्लेसमेंट ऑफ फर्नीचर अपने आप सही हो जाता है।
उग्र तस्वीरों की मनाही
वास्तुशास्त्र के अनुसार महाभारत की तस्वीरें या हिंसक जानवरों की तस्वीरें लगाना अशुभ माना जाता है। इसलिए लोगों को ज्यादातर सीता-राम, शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण आदि की जोड़े से ही तस्वीर लगाने की सलाह दी जाती है।
वहीं फेंगशुई में कहा गया है कि घर में कभी भी हिंसक तस्वीरें न लगाएं। तस्वीर अकेले की न हो, जोड़ों की हो।
दिशाओं का महत्व
दोनों ही शास्त्रों में ईशान कोण और पूर्व दिशा को बहुत ही पवित्र माना गया है और इसे साफ-स्वच्छ रखने की सलाह दी गई है। अत: दोनों शास्त्रों के अनुसार, ईशान कोण में टॉयलेट नहीं बनाने का निर्देश स्पष्ट होता है।