{"_id":"62712191bb65df1a2d5d99b8","slug":"shani-gochar-2022-shani-dev-is-going-to-change-the-zodiac-sign","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shani Gochar 2022: 30 साल बाद शनि का कुंभ राशि में प्रवेश, इन राशि को मिली साढ़ेसाती से मुक्ति","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
Shani Gochar 2022: 30 साल बाद शनि का कुंभ राशि में प्रवेश, इन राशि को मिली साढ़ेसाती से मुक्ति
Tue, 03 May 2022 06:05 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 03 May 2022 06:05 PM IST
सार
शनि के राशि परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव उन राशि के जातकों पर होता है जिन पर शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैय्या का असर रहता है।
विज्ञापन
shani gochar 2022: शनि के कुंभ राशि में गोचर से कर्क और वृश्चिक वालों पर ढैय्या शुरू हो चुकी है। मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि की ढैय्या खत्म हो गई है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
साल 2022 का सबसे बड़ा राशि परिवर्तन बीते माह की 29 तारीख को हुआ है। न्याय के कारक ग्रह शनि 30 वर्षो बाद 29 अप्रैल को मकर राशि को छोड़कर अपनी दूसरी स्वराशि कुंभ में प्रवेश कर गए हैं। शनि एक राशि में ढाई वर्ष तक रहते हैं। शनिदेव बहुत ही मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि 5 जून को कुंभ राशि में वक्री हो जायेगे और 13 जुलाई 2022 को वक्री होकर पुनः मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे तथा 17 जनवरी 2023 को पूर्ण रूप से कुंभ राशि में आ जाएंगे।
विज्ञापन
इस राशि को मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति
शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करने के साथ ही धनु राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन 12 जुलाई 2022 को एक बार फिर से शनि वक्री अवस्था में आते ही दोबारा से मकर राशि में प्रवेश करने से धनु राशि पर शनि साढ़ेसाती फिर से शुरू हो जाएगी और ऐसी स्थिति 17 जनवरी 2023 तक रहेगी। ज्योतिष में शनि ग्रह को विशेष दर्जा प्राप्त है और जब-जब शनि ग्रह का राशि परिवर्तन होता है तो इसका प्रभाव सभी 12 राशि के जातकों पर किसी न किसी रूप में होता है। शनि के राशि परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव उन राशि के जातकों पर होता है जिन पर शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैय्या का असर रहता है।
विज्ञापन
दो राशि वालों पर शनि की ढैय्या
शनि के कुंभ राशि में गोचर से कर्क और वृश्चिक वालों पर ढैय्या शुरू हो चुकी है। मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि की ढैय्या खत्म हो गई है। शनिदेव तुला राशि में हमेशा अच्छा परिणाम देते हैं यानि तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। शनि को कुंभ और मकर राशि के स्वामी माना जाता है। अगर किसा जातक की कुंडली में शनि मजबूत और शुभ भाव में बैठे होते हैं तो व्यक्ति को बहुत सम्मान और पैसा प्राप्त होता है।
विज्ञापन
शनि साढ़ेसाती काल में दुःख ही नहीं देते, सुख भी देते हैं। बल्कि सुख के दिन दुःख के दिनों से ज्यादा होते हैं। बल्कि जन्म लग्न, सूर्य लग्न तथा चन्द्र लग्न, इन दिनों से ही जन्म पत्रिका के केन्द्र भाव में या त्रिकोण भाव में शनि स्थित हों तो अत्यंत शुभ फल देने की स्थिति में आ जाते हैं। चन्द्र राशि से चौथे और आठवें भाव में अगर शनि गोचर करें तो इसे ढैय्या कहते हैं और इसके अशुभ फल प्राप्त होते हैं। इस बार यह हो रहा है कि ना केवल शनि राशि बदल रहे हैं बल्कि बृहस्पति, राहु और केतु भी अप्रैल माह में ही राशि बदल चुके हैं। इसलिए इन ग्रहों के मिश्रित परिणाम होंगे।
विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्ष की गणना की जाती है जिनमें से शनिदेव को 19 वर्ष प्रदान किये गये हैं। शनि की दशा के समय ही यदि साढ़े साती आ जाये तो परिणामों में तीव्रता आ जाती है। ज्योतिष में शनि को दण्डनायक कहा गया है और ये कर्मों का फल प्रदान करते हैं। शनि की दशा या साढ़े साती काल में व्यक्ति साधारण नहीं रह पाता, बल्कि उसका उत्थान या पतन देखने को मिलता है।