{"_id":"5b3cae124f1c1b55238b4745","slug":"sonali-bendre-diagnosed-with-cancer-inauspicious-sign-in-kundli-according-to-astrology","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सोनाली पर ज्योतिषवाणी: कुंडली में ये अशुभ योग होने पर पनपती है कैंसर जैसी बीमारी ","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
सोनाली पर ज्योतिषवाणी: कुंडली में ये अशुभ योग होने पर पनपती है कैंसर जैसी बीमारी
ज्योतिष डेस्क,अमर उजाला
Updated Wed, 04 Jul 2018 05:01 PM IST
विज्ञापन
बॉलीवुड एक्टर इरफान खान के बाद एक और फेमस एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को कैंसर होने की खबर आई है। सोनाली को हाई ग्रेड कैंसर हुआ है और वह इलाज के लिए न्यूयॉर्क रवाना हो गई है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि किसी सेलिब्रिटी को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हुई हो।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में अशुभ ग्रहों के कारण कैंसर होने की संभावना बनती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहों की विशेष युति होने के कारण ही व्यक्ति को कैंसर जैसे गंभीर बीमारी से जूझना पड़ता है। जन्म कुंडली देखकर कैंसर के पीछे के वास्तविक कारणों को जाना जा सकता है।
विज्ञापन
कुंडली में बुरे ग्रहों के कारण कैंसर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, छाया ग्रह कहे जाने वाले राहु-केतु जिन-जिन भाव में होते हैं उन अंगों में कैंसर होने की आशंका ज्यादा होती है। इसके अलावा कुंडली में बुरे ग्रहों के दोष के कारण कैंसर हो सकता है। आइए जानते हैं।
- अगर शनि, मंगल और राहु-केतु की युति छठे, आठवें और बारहवें भाव में होता है तो कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है।
- किसी पापी ग्रह की युति चंद्रमा के साथ छठे, आठवें और बारहवें भाव में होता है तो कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है।
-लग्न पर पापी ग्रहों के दृष्टि होने पर भी कैंसर जैसी धातक बीमारी होने की संभावना होती है।
-चंद्रमा और मंगल पर अन्य पाप ग्रह की दृष्टि संबंध होने पर रक्त कैंसर होने की ज्यादा आशंका होती है।
व्यक्ति के शरीर में कैंसर रोग कोशिकाओं पर होता है। कोशिकाओं में सफेद और लाल रक्तकण होते हैं। ज्योतिष में श्वेत रक्तकण के कारक चंद्रमा है जोकि कर्क राशि का स्वामी है। जबकि लाल रक्तकण के लिए मंगल ग्रह कारक है। कर्क यानि केकड़ा जिसका स्वभाव किसी भी चीज को अपने पंजों में जोर से पकड़कर रखने की होती है। इसलिए कैंसर जैसे रोग के लिए कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा का महत्व होता है। इसी तरह से लाल कण की कमी से प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है इसका कारण मंगल का उग्र स्वभाव का होना माना जाता है।
- अगर शनि, मंगल और राहु-केतु की युति छठे, आठवें और बारहवें भाव में होता है तो कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है।
- किसी पापी ग्रह की युति चंद्रमा के साथ छठे, आठवें और बारहवें भाव में होता है तो कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है।
-लग्न पर पापी ग्रहों के दृष्टि होने पर भी कैंसर जैसी धातक बीमारी होने की संभावना होती है।
-चंद्रमा और मंगल पर अन्य पाप ग्रह की दृष्टि संबंध होने पर रक्त कैंसर होने की ज्यादा आशंका होती है।
व्यक्ति के शरीर में कैंसर रोग कोशिकाओं पर होता है। कोशिकाओं में सफेद और लाल रक्तकण होते हैं। ज्योतिष में श्वेत रक्तकण के कारक चंद्रमा है जोकि कर्क राशि का स्वामी है। जबकि लाल रक्तकण के लिए मंगल ग्रह कारक है। कर्क यानि केकड़ा जिसका स्वभाव किसी भी चीज को अपने पंजों में जोर से पकड़कर रखने की होती है। इसलिए कैंसर जैसे रोग के लिए कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा का महत्व होता है। इसी तरह से लाल कण की कमी से प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है इसका कारण मंगल का उग्र स्वभाव का होना माना जाता है।