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Shani Gochar 2025: शनिदेव करेंगे अब गुरु की राशि में गोचर, जानें वृषभ राशि पर कैसा होगा असर ?
Mon, 10 Mar 2025 03:39 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 10 Mar 2025 03:39 PM IST
सार
Shani Gochar 2025: 29 मार्च को शनि मीन राशि में गोचर करेंगे। शनि के ढाई साल बाद राशि परिवर्तन करने पर वृभष राशि पर कैसा होगा प्रभाव। आइए जानते हैं ।
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shani gochar 2025: शनि गोचर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Shani Gochar 2025: शनि ग्रह का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व होता है। शनिदेव का गोचर एक से दूसरी राशि में गोचर लगभग ढाई वर्ष बाद होता है, इसलिए यह सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह कहलाए जाते हैं। अब इसी महीने 29 मार्च को शनि जोकि कुंभ राशि में हैं यहां की यात्रा को विराम देते हुए मीन राशि मे गोचर करेंगे। आपको बता दें कि इसके पहले शनि 22 फरवरी 2025 को अस्त हो जाएंगे और इस अस्त रहते हुए 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिष में शनि
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे अहम और शक्तिशाली ग्रह माना गया है। शनि न्याय, कर्म, मेहनत, पीड़ा, कष्ट, संघर्ष और धैर्य के कारक ग्रह होते हैं। सभी नवग्रहों में कर्मफलदाता शनि सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, इस तरह से सभी 12 राशियों का एक चक्कर को पूरा करने के लिए शनि 30 वर्ष का समय लेते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए होते हैं क्योंकि यहीं एकमात्र ग्रह हैं जिनके पास साढ़ेसाती और ढैय्या है। हर एक जातकों के जीवन में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का व्यापक असर पड़ता है।
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आमतौर पर शनि का नाम आते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि शनि की टेढ़ी नजर न पड़ जाए, लेकिन शनि एक न्यायप्रिय ग्रह हैं जो लोगों को उनके कर्मों के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार की द्दष्टि अगर किसी पर पड़ जाय तो उसका कुछ न कुछ अनिष्ट जरूर होता है। शनि को मकर और कुंभ राशि का स्वमित्व प्राप्त है। ये तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि की बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रहती है जबकि सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका शत्रुवत व्यवहार होता है। जबकि देवगुरु बृहस्पति और केतु से इनका संबंध सम रहता है।
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आपको बता दें कि न्याय के देवता शनि इस साल 29 मार्च को अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ से निकलकर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। शनि के मीन राशि में गोचर करने से कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कंटक शनि की पनौती से छुटकारा मिल जाएगा वहीं कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाएगी। शनि के गोचर करने से सभी 12 राशियों पर कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा। शनि के मीन राशि में परिवर्तन का वृषभ राशि पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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वृषभ राशि पर शनि के गोचर का प्रभाव
शनि का गोचर आपकी राशि के एकादश भाव यानी लाभ स्थान में होगा। आपको बता दें वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि देव नवम और दशम भाव के स्वामी होकर योगकारक ग्रह कहलाते हैं। 29 मार्च के बाद शनि आपके लिए काफी शुभ साबित होंगे। लाभ के अच्छे मौके मिलेंगे। आपकी हर तरह की इच्छाएं पूरी होंगी। एकादश भाव में शनि के आने पर इनकी द्दष्टि आपके लग्न भाव यानी आपके ऊपर, पंचम भाव और अष्टम भाव रहेंगी जिससे आपके लिए कष्टों में कमी और सफलता मिलने के योग हैं। वैदिक ज्योतिष में ग्यारहवें भाव के शनि को अच्छा कहा जाता है। नौकरीपेशा जातकों को नौकरी में तरक्की और व्यापार में अच्छा मुनाफा दिलाने के योग हैं। आपके धन संबंधी कार्य में जो पिछले कुछ महीने से रुकावटें आ रही हैं वह दूर होंगी। लंबी यात्राओं के योग भी हैं।
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ज्योतिष में शनि
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे अहम और शक्तिशाली ग्रह माना गया है। शनि न्याय, कर्म, मेहनत, पीड़ा, कष्ट, संघर्ष और धैर्य के कारक ग्रह होते हैं। सभी नवग्रहों में कर्मफलदाता शनि सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, इस तरह से सभी 12 राशियों का एक चक्कर को पूरा करने के लिए शनि 30 वर्ष का समय लेते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए होते हैं क्योंकि यहीं एकमात्र ग्रह हैं जिनके पास साढ़ेसाती और ढैय्या है। हर एक जातकों के जीवन में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का व्यापक असर पड़ता है।
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आमतौर पर शनि का नाम आते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि शनि की टेढ़ी नजर न पड़ जाए, लेकिन शनि एक न्यायप्रिय ग्रह हैं जो लोगों को उनके कर्मों के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार की द्दष्टि अगर किसी पर पड़ जाय तो उसका कुछ न कुछ अनिष्ट जरूर होता है। शनि को मकर और कुंभ राशि का स्वमित्व प्राप्त है। ये तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि की बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रहती है जबकि सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका शत्रुवत व्यवहार होता है। जबकि देवगुरु बृहस्पति और केतु से इनका संबंध सम रहता है।
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वृषभ राशि पर शनि के गोचर का प्रभाव
शनि का गोचर आपकी राशि के एकादश भाव यानी लाभ स्थान में होगा। आपको बता दें वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि देव नवम और दशम भाव के स्वामी होकर योगकारक ग्रह कहलाते हैं। 29 मार्च के बाद शनि आपके लिए काफी शुभ साबित होंगे। लाभ के अच्छे मौके मिलेंगे। आपकी हर तरह की इच्छाएं पूरी होंगी। एकादश भाव में शनि के आने पर इनकी द्दष्टि आपके लग्न भाव यानी आपके ऊपर, पंचम भाव और अष्टम भाव रहेंगी जिससे आपके लिए कष्टों में कमी और सफलता मिलने के योग हैं। वैदिक ज्योतिष में ग्यारहवें भाव के शनि को अच्छा कहा जाता है। नौकरीपेशा जातकों को नौकरी में तरक्की और व्यापार में अच्छा मुनाफा दिलाने के योग हैं। आपके धन संबंधी कार्य में जो पिछले कुछ महीने से रुकावटें आ रही हैं वह दूर होंगी। लंबी यात्राओं के योग भी हैं।