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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Saturn Transit 2025 Shani Vakri For 138 Days Know Effect On Capricorn Zodiac Signs

Saturn Transit 2025: मीन राशि में शनि हुए वक्री, जानें मकर राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव

Tue, 22 Jul 2025 05:57 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 22 Jul 2025 05:57 AM IST
सार

Shani Vakri 2025: मकर राशि वालों के लिए शनि आपके लग्न भाव के स्वामी होने के साथ-साथ धन भाव के भी स्वामी है, जो इस समय आपके तीसरे भाव में वक्री हो रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव में शनि के गोचर का प्रभाव सामान्य तौर पर शुभ फल देने वाला होता है।

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Saturn Transit 2025 Shani Vakri For 138 Days Know Effect On Capricorn Zodiac Signs
शनि मीन राशि में वक्री - फोटो : adobe stock

विस्तार

Shani Vakri 2025: 13 जुलाई से शनि मीन राशि में वक्री हो चुके हैं और यह 138 दिनों तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे। शनि 28 नवंबर तक मीन राशि में वक्री चाल से चलेंगे। ज्योतिष में शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है और यह करीब ढाई वर्षो में राशि परिवर्तन करते हैं। शनि के वक्री होने से इसका प्रभाव देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलेगा। शनिदेव को ज्योतिष में कर्मफलदाता और न्यायाधिपति कहा जाता है। यह व्यक्तियों को उनके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनिदेव अगर शुभ स्थान पर होते हैं उनको जीवन में शुभ फल वहीं जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थान पर होते हैं उनको तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं शनि के वक्री होने से मकर राशि वालों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिल रहा है। 
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मकर राशि पर शनि के वक्री का प्रभाव
मकर राशि वालों के लिए शनि आपके लग्न भाव के स्वामी होने के साथ-साथ धन भाव के भी स्वामी है, जो इस समय आपके तीसरे भाव में वक्री हो रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव में शनि के गोचर का प्रभाव सामान्य तौर पर शुभ फल देने वाला होता है। लेकिन वक्री शनि के कारण आपकी अनुकूलता में कमी देखने को मिलेगी। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 
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ज्योतिष में शनि ग्रह 
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है। 
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होती है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं। 
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं। 
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और औजारों के कारक ग्रह होते हैं। शनिदेव अनुराधा, पुष्य और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं। 

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