{"_id":"5b3475bd4f1c1b5d748b7389","slug":"mars-in-capricorn-rashi-on-27-june-2018-astrology-tips","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मंगल के मकर राशि में वक्री होने से घट सकती हैं अनहोनी घटनाएं, करें ये उपाय","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
मंगल के मकर राशि में वक्री होने से घट सकती हैं अनहोनी घटनाएं, करें ये उपाय
डॉ पुनीत गुप्ता, ज्योतिषाचार्य
Updated Thu, 28 Jun 2018 11:19 AM IST
विज्ञापन
ज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम का प्रतीक माना गया है। मंगल मकर राशि में तो 2 मई को 16:19 पर प्रवेश कर चुके हैं। जबकि ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी बुधवार दिनांक 26-27 जून की मध्यरात्रि को 2.35 मिनट पर मंगल अपनी उच्च राशि मकर में वक्री हो गये है और यह लगभग 27 अगस्त 2018 भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा सोमवार को सायं 7.35 बजे इसी राशि में मंगल मार्गी होकर इसी राशि में गोचर करेंगे और 6 नवंबर को अपनी अगली राशि कुंभ में 08:21 पर प्रवेश करेंगे।
विज्ञापन
इस तरह से मंगल 2018 में मकर राशि में काफी लंबा समय व्यतीत करने वाले हैं ज्योतिष दृष्टि से देखा जाए तो शनि देव मेहनत, रुकावटों, अडचनों , दुख-दर्द, बीमारी, दुर्घटना चोट आदि का प्रतिनिधित्व करतें हैं और वही मंगल लड़ाई झगड़ा, गुस्से,साहस और रक्त का प्रतीक है। इस तरह से देखा जाए तो मंगल कहीं ना कहीं नारात्मक प्रभाव देने वाला है। मंगल का शनि की राशि मकर में 6 महीने तक लंबा समय व्यतीत करना एक अनहोनी घटना को जन्म देने वाला है। उच्च का मंगल वक्री होकर जब गोचर करता है तो कुछ कुछ ना कुछ अनदेखे अनचाहे प्रभाव देता है।
विज्ञापन
मकर मंगल की उच्च राशि भी है। जिसके कारण बहुत से उतार चढ़ाव देखने को मिलेंगे और जिनकी मंगल की शनि की या शुक्र की महादशा चल रही है वह लोग इसको पूरी तरह सच का सामना करने के लिए तैयार रहें। इस वक्त का अगर गोचर देखा जाए तो मंगल के उच्च का हो मकर राशि में वक्री होकर गोचर करने से ग्रहों की चाल बहुत ही एक अजब सी स्थितिया चुकी है जहां शुक्र, बुध और राहु कर्क राशि में है वही उसके सामने मंगल केतु मकर राशि में वक्री स्थिति में है।
विज्ञापन
बृहस्पति देव तुला में और शनि देव धनु राशि में चंद्र के साथ है जहां एक तरफ, बुध, शुक्र और राहु मंगल और केतु पर सीधी दृष्टि बनाए हुए हैं और वहीं दूसरी तरफ शनि और सूर्य एक दूसरे पर समसप्तक दृष्टि बनाये हुए हैं। मंगल की 4,7,8 दृष्टि भी अपना प्रभाव छोड़ेगी। शौर्य, साहस, बल, पराक्रम का प्रतिनिधि ग्रह मंगल 27 जून को अपनी उच्च राशि मकर में वक्री होने के कारण सभी राशियां प्रभावित होंगी। खासकर जो लोग मंगल की महादशा, अंतर्दशा से गुजर रहे हैं, या जिनकी जन्मकुंडली में मंगल वक्री हों या नेष्टप्रद हों उन्हें इस दौरान कई तरह के संकटों से गुजरना पड़ सकता है।
लोगों पर कर्ज बढ़ेगा, भूमि, भवन,संपत्ति संबंधी कार्य अटकेंगे,वैवाहिक जीवन, यौन सुख पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। मंगल के वक्रत्व से रोग जन्म लेते हैं मकर शनि की ही राशि है जिसमें मंगल वक्री हो रहा है और शनि पहले से ही वक्री चल रहा है। तो दोनों ग्रहों मंगल और शनि के एक साथ वक्रत्व काल से गुजरना शुभ नहीं कहा जा सकता।
इससे पृथ्वी पर अनाचार, अत्याचार बढ़ेंगे। बड़ी प्राकृतिक आपदाएं आएंगी। धरती के कुछ इलाकों में अति वृष्टि के कारण तबाही आ सकती है। भूकंप, बाढ़, जलजला, समुद्र में तूफान, समुद्र में ज्वालामुखी का फटना, समुद्र में भूकंप, तेल के कुओं में आग लगने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। देश में बड़ी राजनीति उठापटक होगी। किसी बड़े नेता की हानि हो सकती है। सैन्य प्रधान देशों में स्थिति बिगड़ सकती है।
वक्री मंगल में ये बिलकुल न करें-
वक्री मंगल में ये बिलकुल न करें-
वक्री मंगल की दशा या अंतर्दशा में वाद-विवाद से बचना चाहिए।
अपने निवास स्थान पर घातक वस्तुओं, हथियारों का भंडारण न करें।
मंगल के वक्री होने के समय कोई नया वाहन या नई संपत्ति नहीं खरीदने की सलाह दी जाती है।
वक्री मंगल की दशा में गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।
अगर संभव हो और कोई इमर्जेंसी ना हो तो किसी भी प्रकार का ऑपरेशन या सर्जरी नहीं करवाना चाहिए।
इस समय नया मुकदमा आरंभ करना उचित नहीं होता, क्योंकि इससे धन का नाश और संताप ही प्राप्त होगा।
मंगल की वक्रता में छल कपट धोखा देना व्यक्ति के स्वभाव में देखा जा सकता है।
वक्री मंगल के बुरे प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपाय-
मंगल की वक्रता में मंगल के मंत्र ऊं भौमाय नम: का लगातार मानसिक जाप करते रहना चाहिए।
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।
बंदरों को गुड़-चने खिलाने से मंगल प्रसन्न होते हैं।
मंगलवार को सुबह हनुमान मंदिर में सिंदूर चोला चढ़ाएं, हनुमान जी को शुद्ध घी से बने हलवे का भोग लगाएं।
मंगल के वक्री होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी आती हैं क्योंकि मंगल रक्त और मांस पर अधिकार रखता है।
इस संकट से बचने के लिए मंगलवार को किसी दुर्गा मंदिर में आटे के पांच दीपक लगाएं। दुर्गा चालीसा का पाठ करें और 9 कन्याओं को खीर खिलाएं।
मंगल के वक्रत्व काल के दौरान लाल मूंगे से बने गणपति का पेन्डेन्ट धारण करना शुभ रहता है।
मंगलवार के दिन मसूर की दाल शिवलिंग पर अर्पित करने से मंगल से जुड़े सारे दोष समाप्त हो जाते हैं।
मंगलवार को किसी सिद्ध हनुमान प्रतिमा पर से थोड़ा सा सिंदूर लाकर अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाने से
मंगल के दोष घर में प्रवेश नहीं करते। घर और उसमें रहने वाले सभी सदस्यों का संकटों से बचाव होता है।
वक्री मंगल की दशा या अंतर्दशा में वाद-विवाद से बचना चाहिए।
अपने निवास स्थान पर घातक वस्तुओं, हथियारों का भंडारण न करें।
मंगल के वक्री होने के समय कोई नया वाहन या नई संपत्ति नहीं खरीदने की सलाह दी जाती है।
वक्री मंगल की दशा में गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।
अगर संभव हो और कोई इमर्जेंसी ना हो तो किसी भी प्रकार का ऑपरेशन या सर्जरी नहीं करवाना चाहिए।
इस समय नया मुकदमा आरंभ करना उचित नहीं होता, क्योंकि इससे धन का नाश और संताप ही प्राप्त होगा।
मंगल की वक्रता में छल कपट धोखा देना व्यक्ति के स्वभाव में देखा जा सकता है।
वक्री मंगल के बुरे प्रभावों से बचने के लिए कुछ उपाय-
मंगल की वक्रता में मंगल के मंत्र ऊं भौमाय नम: का लगातार मानसिक जाप करते रहना चाहिए।
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।
बंदरों को गुड़-चने खिलाने से मंगल प्रसन्न होते हैं।
मंगलवार को सुबह हनुमान मंदिर में सिंदूर चोला चढ़ाएं, हनुमान जी को शुद्ध घी से बने हलवे का भोग लगाएं।
मंगल के वक्री होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी आती हैं क्योंकि मंगल रक्त और मांस पर अधिकार रखता है।
इस संकट से बचने के लिए मंगलवार को किसी दुर्गा मंदिर में आटे के पांच दीपक लगाएं। दुर्गा चालीसा का पाठ करें और 9 कन्याओं को खीर खिलाएं।
मंगल के वक्रत्व काल के दौरान लाल मूंगे से बने गणपति का पेन्डेन्ट धारण करना शुभ रहता है।
मंगलवार के दिन मसूर की दाल शिवलिंग पर अर्पित करने से मंगल से जुड़े सारे दोष समाप्त हो जाते हैं।
मंगलवार को किसी सिद्ध हनुमान प्रतिमा पर से थोड़ा सा सिंदूर लाकर अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाने से
मंगल के दोष घर में प्रवेश नहीं करते। घर और उसमें रहने वाले सभी सदस्यों का संकटों से बचाव होता है।