{"_id":"6800d0a4b66fadfdda0a015f","slug":"guru-gochar-2025-jupiter-transit-in-mithun-and-make-atichari-positive-impact-2025-04-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Guru Gochar 2025: देवगुरु बृहस्पति साल 2032 तक रहेंगे अतिचारी, जानें राशियों पर प्रभाव","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
Guru Gochar 2025: देवगुरु बृहस्पति साल 2032 तक रहेंगे अतिचारी, जानें राशियों पर प्रभाव
Thu, 17 Apr 2025 03:28 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 17 Apr 2025 03:28 PM IST
सार
देवगुरु बृहस्पति 14 मई को रात 11 बजकर 20 मिनट पर बुध के स्वामित्व वाली राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। गुरु के मिथुन राशि में गोचर होने से ये अतिचारी हो जाएंगे। मिथुन राशि के बाद ये 18 अक्तूबर को कर्क राशि में आएंगे। इसके बाद 5 दिसंबर देवगुरु दोबारा से मिथुन राशि में आ जाएंगे।
विज्ञापन
गुरु के अतिचारी होने का प्रभाव
- फोटो : Adobe Stock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Guru Gochar 2025: 14 मई 2025 को देवताओं के गुरु बृहस्पति राशि परिवर्तन करते हुए मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस साल शनि के बाद दूसरा सबसे बड़ा राशि परिवर्तन गुरु का होगा, जो मिथुन राशि में प्रवेश करते ही अतिचारी हो जाएंगे। यहां पर अतिचारी का मतलब यह कि गुरु अपनी सामान्य चाल के मुकाबले बहुत ही तेज गति से चलेंगे। गुरु के अतिचारी होने की वजह से गुरु की चाल में जल्दी-जल्दी बदलाव आएगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवताओं के गुरु बृहस्पति को सुख-समृद्धि, विवाह, अध्यात्म, संतान, विद्या, शिक्षा और ज्ञान आदि का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु के अतिचारी होने की वजह से कई राशि वालों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। देवगुरु का अतिचारी गोचर साल 2032 तक चलेगा। आइए जानते हैं गुरु के अतिचारी होने से किन राशियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।
गुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन कब
वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक देवगुरु बृहस्पति 14 मई को रात 11 बजकर 20 मिनट पर बुध के स्वामित्व वाली राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। गुरु के मिथुन राशि में गोचर होने से ये अतिचारी हो जाएंगे। मिथुन राशि के बाद ये 18 अक्तूबर को कर्क राशि में आएंगे। इसके बाद 5 दिसंबर देवगुरु दोबारा से मिथुन राशि में आ जाएंगे।
गुरु के अतिचारी होने का प्रभाव
गुरु सभी ग्रहों में सबसे बड़े और शुभ ग्रह माने जाते हैं। गुरु एक साल में राशि परिवर्तन करते हैं। गुरु का कई गुने से अधिक चाल से चलना देश-दुनिया पर प्रभाव देखने को मिलता है। गुरु के अतिचारी होने से देश-दुनिया और व्यक्ति के जीवन में कई तरह की उथल-पुथल मचा सकते हैं। गुरु के अतिचारी होने से दुनिया में कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं, आर्थिक मंदी और विपदा ला सकते हैं।
विज्ञापन
मेष राशि
वैदिक गणना के अनुसार मेष राशि के जातकों के लिए गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी होकर आपके तीसरे भाव में प्रवेश करेंगे। इससे इस राशि वालों को अध्यात्म की तरफ बहुत तेजी से झुकाव देखने को मिल सकता है। भाग्य का अच्छा साथ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार और और अचानक लाभ के संयोग भी होंगे।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव में प्रवेश करेंगे। गुरु का दूसरे भाव में गोचर होने से धन-दौलत और सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि देखने को मिलेगी। परिवार में प्रेम बढ़ेगा। जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है। हालांकि गुरु के मिथुन राशि में गोचर होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में इजाफा हो सकता है।
लाभ भाव में गुरु का गोचर होना सिंह राशि वालों के लिए सभी तरह की सुख-सुविधाओं में इजाफा दिला सकता है। पांचवें और आठवें भाव के स्वामी होकर गुरु 14 मई को एकादश भाव में प्रवेश करेंगे। ऐसे में आकस्मिक धन लाभ के योग का निर्माण होगा। जो लोग नौकरीपेशा है उन्हें नौकरी में प्रमोशन, अवसरों में वृद्धि और अच्छी सफलता मिल सकती है। आमदनी में बढ़ोतरी होने के प्रबल संकेत हैं।
तुला राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और छठे भाव के स्वामी होकर नवम भाव यानी भाग्य भाव में रहने वाले हैं। इस तरह से गुरु के गोचर होने से इस राशि के जातकों को भाग्य का बहुत अच्छा साथ मिलेगा। कार्यो में सफलता और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। परिवार में सुखी के पल मिलेंगे जिससे मिल बांटकर मनाएंगे।
विज्ञापन
गुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन कब
वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक देवगुरु बृहस्पति 14 मई को रात 11 बजकर 20 मिनट पर बुध के स्वामित्व वाली राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। गुरु के मिथुन राशि में गोचर होने से ये अतिचारी हो जाएंगे। मिथुन राशि के बाद ये 18 अक्तूबर को कर्क राशि में आएंगे। इसके बाद 5 दिसंबर देवगुरु दोबारा से मिथुन राशि में आ जाएंगे।
विज्ञापन
गुरु के अतिचारी होने का प्रभाव
गुरु सभी ग्रहों में सबसे बड़े और शुभ ग्रह माने जाते हैं। गुरु एक साल में राशि परिवर्तन करते हैं। गुरु का कई गुने से अधिक चाल से चलना देश-दुनिया पर प्रभाव देखने को मिलता है। गुरु के अतिचारी होने से देश-दुनिया और व्यक्ति के जीवन में कई तरह की उथल-पुथल मचा सकते हैं। गुरु के अतिचारी होने से दुनिया में कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं, आर्थिक मंदी और विपदा ला सकते हैं।
विज्ञापन
Trigrahi Yog: शनि ग्रह का दुर्लभ त्रिग्रही योग, इन 3 राशियों पर होगी शनि-शुक्र-बुध की कृपा
अतिचारी गुरु का राशियों पर प्रभावमेष राशि
वैदिक गणना के अनुसार मेष राशि के जातकों के लिए गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी होकर आपके तीसरे भाव में प्रवेश करेंगे। इससे इस राशि वालों को अध्यात्म की तरफ बहुत तेजी से झुकाव देखने को मिल सकता है। भाग्य का अच्छा साथ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार और और अचानक लाभ के संयोग भी होंगे।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव में प्रवेश करेंगे। गुरु का दूसरे भाव में गोचर होने से धन-दौलत और सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि देखने को मिलेगी। परिवार में प्रेम बढ़ेगा। जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है। हालांकि गुरु के मिथुन राशि में गोचर होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में इजाफा हो सकता है।
Lucky Rashiyan: 20 अप्रैल से इन राशि वालों की चमक सकती हैं किस्मत, बन रहा है गजकेसरी राजयोग
सिंह राशिलाभ भाव में गुरु का गोचर होना सिंह राशि वालों के लिए सभी तरह की सुख-सुविधाओं में इजाफा दिला सकता है। पांचवें और आठवें भाव के स्वामी होकर गुरु 14 मई को एकादश भाव में प्रवेश करेंगे। ऐसे में आकस्मिक धन लाभ के योग का निर्माण होगा। जो लोग नौकरीपेशा है उन्हें नौकरी में प्रमोशन, अवसरों में वृद्धि और अच्छी सफलता मिल सकती है। आमदनी में बढ़ोतरी होने के प्रबल संकेत हैं।
Shani Dev Ki Priya Rashi: शनिदेव की विशेष कृपा से इन राशियों का भाग्य बदलता है, मिलता है अपार धन और प्रतिष्ठा
तुला राशितुला राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और छठे भाव के स्वामी होकर नवम भाव यानी भाग्य भाव में रहने वाले हैं। इस तरह से गुरु के गोचर होने से इस राशि के जातकों को भाग्य का बहुत अच्छा साथ मिलेगा। कार्यो में सफलता और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। परिवार में सुखी के पल मिलेंगे जिससे मिल बांटकर मनाएंगे।