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Guru Transit 2025: गुरु का मिथुन राशि में गोचर, जानें मीन राशि पर किस तरह का पड़ेगा प्रभाव
Sun, 07 Dec 2025 02:02 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 07 Dec 2025 02:02 PM IST
सार
Guru Gochar 2025:4 दिसंबर से वक्री गुरु मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं जिससे कुछ राशि वालों को इसका अच्छा लाभ मिलने का संभावना है।
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Guru Gochar 2025: गुरु को शुभ, अच्छा फल देने वाला और एक सौम्य ग्रह माना जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मीन राशि पर गुरु के गोचर का प्रभाव
मीन राशि वालों के लिए देवगुरु बृहस्पति पहले और दशम भाव के स्वामी होते हैं और 4 दिसंबर को गुरु का वक्री अवस्था में रहते हुए मिथुन राशि में गोचर आपके चौथे भाव में होगा। घर परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में आपकी परेशानियों में वृद्धि होगी। इस दौरान आपको किसी तरह के शुभ कार्य करने की प्रेरणा मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यक्षमता इस दौरान प्रभावित होगी। व्यवसाय में आपको मानसिक तनाव से गुजरना पड़ सकता है। इस दौरान आपकी आर्थिक लाभ की प्राप्ति की संभावना कम हो सकती है। इस दौरान आपके खर्चों में वृद्धि होगी। वैवाहिक जीवन में आज खुशियां को साझा करने में सफलता मिलेगी। सेहत में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।
आपको बात दें कि ज्योतिष में गुरु ग्रह का विशेष महत्व होता है। इन्हें देवगुरु का दर्जा मिला हुआ है। यह बुद्धि, धर्म, ज्ञान, सुख, सौभाग्य, धन और विवाह के कारक ग्रह होते हैं। गुरु ग्रह की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। गुरु ग्रह की शुभ द्दष्टि जिस भाव में पड़ती है उसमें लगातार वृद्धि और विस्तार होता है।
ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है।
- गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी होते हैं।
- कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं जबकि मकर राशि में गुरु नीच के होते हैं।
- गुरु बृहस्पति को तीन विशेष द्दष्टियां प्राप्त है। पांचवी, सातवीं और नौवीं द्दष्टि।
- वैदिक ज्योतिष में गुरु बड़े भाई, शिक्षा, धन, संतान, ज्ञान और शिक्षा के कारक होते हैं।
- गुरु बृहस्पति पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के स्वामी होते हैं।
- जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव यानी लग्न में गुरु स्वयं बैठ जाएं तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली और ज्ञानी होता है।
- कालपुरुष की कुंडली में गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं और यह दूसरे, पांचवें, नौवें,दसवें और ग्यारहवें भाव के कारक होते है।
- गुरु के दूसरे भाव में यानी धन के भाव में होने पर जातक बहुत धनी और समृद्धिशाली रहता है।
-जब गुरु कुंडली के पांचवें भाव में होते हैं या फिर पाचवें भाव पर द्दष्टि डालते हैं तो जातक को उच्च शिक्षा और गुणी संतान की प्राप्ति होती है।
- नवम भाव में गुरु के होने पर व्यक्ति शिक्षा और ज्ञान में परांगत होता है। कुंडली का दशम भाव कार्यक्षेत्र, करियर या पेशे का होता है दशम में गुरु हो तो व्यक्ति समाज में खूब प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है।
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- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का ग्यारहवां भाव आय और लाभ का होता है। गुरु के इस भाव में होने पर जातक बहुत धन अर्जित करने में कामयाब होता है।
- गुरु के कमजोर होने पर जातक को लीवर, किडनी, मधुमेह, पीलिया, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है।
- गुरु का रत्न पुखराज होता है। केले के वृक्ष को गुरु के रूप में पूजा जाता है। बृहस्पति गुरु पीले रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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मीन राशि वालों के लिए देवगुरु बृहस्पति पहले और दशम भाव के स्वामी होते हैं और 4 दिसंबर को गुरु का वक्री अवस्था में रहते हुए मिथुन राशि में गोचर आपके चौथे भाव में होगा। घर परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में आपकी परेशानियों में वृद्धि होगी। इस दौरान आपको किसी तरह के शुभ कार्य करने की प्रेरणा मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यक्षमता इस दौरान प्रभावित होगी। व्यवसाय में आपको मानसिक तनाव से गुजरना पड़ सकता है। इस दौरान आपकी आर्थिक लाभ की प्राप्ति की संभावना कम हो सकती है। इस दौरान आपके खर्चों में वृद्धि होगी। वैवाहिक जीवन में आज खुशियां को साझा करने में सफलता मिलेगी। सेहत में कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है।
आपको बात दें कि ज्योतिष में गुरु ग्रह का विशेष महत्व होता है। इन्हें देवगुरु का दर्जा मिला हुआ है। यह बुद्धि, धर्म, ज्ञान, सुख, सौभाग्य, धन और विवाह के कारक ग्रह होते हैं। गुरु ग्रह की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। गुरु ग्रह की शुभ द्दष्टि जिस भाव में पड़ती है उसमें लगातार वृद्धि और विस्तार होता है।
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ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है।
- गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी होते हैं।
- कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं जबकि मकर राशि में गुरु नीच के होते हैं।
- गुरु बृहस्पति को तीन विशेष द्दष्टियां प्राप्त है। पांचवी, सातवीं और नौवीं द्दष्टि।
- वैदिक ज्योतिष में गुरु बड़े भाई, शिक्षा, धन, संतान, ज्ञान और शिक्षा के कारक होते हैं।
- गुरु बृहस्पति पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के स्वामी होते हैं।
- जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव यानी लग्न में गुरु स्वयं बैठ जाएं तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली और ज्ञानी होता है।
- कालपुरुष की कुंडली में गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं और यह दूसरे, पांचवें, नौवें,दसवें और ग्यारहवें भाव के कारक होते है।
- गुरु के दूसरे भाव में यानी धन के भाव में होने पर जातक बहुत धनी और समृद्धिशाली रहता है।
-जब गुरु कुंडली के पांचवें भाव में होते हैं या फिर पाचवें भाव पर द्दष्टि डालते हैं तो जातक को उच्च शिक्षा और गुणी संतान की प्राप्ति होती है।
- नवम भाव में गुरु के होने पर व्यक्ति शिक्षा और ज्ञान में परांगत होता है। कुंडली का दशम भाव कार्यक्षेत्र, करियर या पेशे का होता है दशम में गुरु हो तो व्यक्ति समाज में खूब प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है।
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- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का ग्यारहवां भाव आय और लाभ का होता है। गुरु के इस भाव में होने पर जातक बहुत धन अर्जित करने में कामयाब होता है।
- गुरु के कमजोर होने पर जातक को लीवर, किडनी, मधुमेह, पीलिया, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है।
- गुरु का रत्न पुखराज होता है। केले के वृक्ष को गुरु के रूप में पूजा जाता है। बृहस्पति गुरु पीले रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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