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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Ganesh Chaturthi 2023 Date Ganesh Sthapana Shubh Muhurat And Puja Vidhi in Hindi

Ganesh Chaturthi 2023: जानिए गणेश स्थापना की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंगलमूर्ति से जुड़ी रोचक बातें

Tue, 19 Sep 2023 07:03 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 19 Sep 2023 07:03 AM IST
सार

गणेश चतुर्थी पर्व 19 सितंबर, मंगलवार के दिन धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन पूजा मुहूर्त सुबह 10:49 से दोपहर 01:16 तक रहेगा। गणेश ज्ञान और बुद्धि के ऐसे देवता हैं,जिनकी उपासना जीवन को शुभ-लाभ की दिशा देती हैं।

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Ganesh Chaturthi 2023 Date Ganesh Sthapana Shubh Muhurat And Puja Vidhi in Hindi
Ganesh Chaturthi 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ganesh Chaturthi 2023: संपूर्ण सृष्टि में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेशजी का श्री सिद्धिविनायक नामधारी जन्मदिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 18 सितंबर दोपहर 02:09 से 19 सितंबर दोपहर 03:13 तक रहेगी। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर्व 19 सितंबर, मंगलवार के दिन धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन पूजा मुहूर्त सुबह 10: 49 मिनट से दोपहर 01:16 मिनट तक रहेगा। गणेश ज्ञान और बुद्धि के ऐसे देवता हैं,जिनकी उपासना जीवन को शुभ-लाभ की दिशा देती हैं। वे विघ्नविनाशक हैं, उनके स्मरण मात्र से भक्तों के कार्यों में आ रही विघ्न-बाधाएं सहजता से दूर हो जाती हैं। आइए जानते हैं गणेशजी की स्थापना की पूरी विधि और गणपति से जुड़ी मुख्य बातें..

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1.सृष्टि के सभी गणों के ईश भगवान श्री गणेश को शास्त्रों ने गजमुख कहा है। गजमुख शब्द में 'गज' का अर्थ आठ होता है। जो आठों दिशाओं की आठों प्रहर रक्षा करता हो,खबर रखता हो वही गजमुख गणेश हैं।
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2.योगशास्त्रीय साधना में शरीर में मेरुदंड के मध्य जो सुषम्ना नाड़ी है वह ब्रह्मरंध में प्रवेश करके नाड़ी समूह से मिल जाती है। इसका आरंभ मूलाधार चक्र ही है,इसी मूलाधार चक्र को गणेश स्थान कहते हैं। इसका तात्पर्य है कि श्री गणेश ही योग के आदि देवता हैं।
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3.शास्त्रों में कहा गया है कि 'गणानां जीवजातानां य ईशः स गणेशः' अर्थात जो समस्त गणों तथा जीव जाति के स्वामी हैं वही गणेश हैं।ये पंचमहाभूत में जलतत्व के अधिपति होकर हर जीव में रक्तरूप में विद्ध्यमान रहते हैं इसलिए शास्त्रों में इनका रंग लाल भी बताया गया है।

4. अथर्ववेद के अनुसार प्रकृति गणेशजी से प्रार्दुभूत हुई है। प्रकृति के अधिपति भी श्री गणेश हैं। चूकिं प्रकृति का रंग हरा है इसलिए गणेशजी के शरीर का रंग हरा बताया गया है।हरा रंग शांति,उन्नति और समृद्धि का प्रतीक है,तभी इन्हें अमृत से उत्पन्न दूर्वा जिसका रंग हरा होता है अतिप्रिय है।

5 . गणेश में 'ग' अक्षर ज्ञानार्थवाचक और 'ण' निर्वाणवाचक है। ईश अधिपति है अर्थात ज्ञान-निर्वाण वाचक गण के ईश गणेश ही परमब्रह्म हैं। आध्यात्मिक भाव से इन्द्रियों के स्वामी होने से भी इन्हें गणेश कहा गया है। सबके हृदय की बात समझ लेने वाले ये सर्वज्ञ हैं।

गणेश स्थापना की पूजाविधि

सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान गणेश की जल,पंचामृत रोली,अक्षत,सुपारी,जनेऊ,सिन्दूर,पुष्प,दूर्वा आदि से पूजा करें फिर लड्डुओं का प्रसाद लगाकर दीप-धूप से उनकी आरती उतारें। सुख-समृद्धि की कामना से गणेशजी के मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' या  'वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा' का यथाशक्ति जप करें।गणेशजी के पूजन के समय प्रसाद के लिए बेसन या बूंदी के लड्डू या गुरधानी का प्रयोग किया जा सकता है। 

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से गणेशजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कष्टों से निवारण और शत्रु बाधा से बचने के लिए 'ॐ गं गणपतये नमः' का पाठ करना उत्तम रहता है। धान की खील से पूजा करना मान-सम्मान दिलाने वाला है,वहीं धन वृद्धि के लिए गणेशजी के साथ लक्ष्मी की पूजा प्रत्येक शुक्रवार को करनी चाहिए। सुख-समृद्धि व संतान प्राप्ति के लिए गणेशजी पर इस दिन सिन्दूर चढ़ाना शुभ होता है।


गणेशजी के पूजन व आरती के समय उनके पिता भगवान शिव, माता पार्वती,भाई कार्तिकेय,दोनों पत्नी रिद्धि व सिद्धि तथा दोनों पुत्र लाभ व क्षेम का ध्यान भी अवश्य करना चाहिए। पूजा-आरती के उपरांत चांदी या लकड़ी के डंडे अवश्य बजाने चाहिए, ऐसा करना बहुत शुभ माना गया है।

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