राशि परिवर्तन: बुध का नीच राशि मीन में प्रवेश, स्टॉक मार्केट के निवेशक रहें सावधान !
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ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले बुध अपनी कुम्भ राशि की यात्रा समाप्त करके 07 अप्रैल को दोपहर बाद 02 बजकर 18 मिनट पर अपनी नीच राशि मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं जहां ये 25 अप्रैल की मध्यरात्रि 02 बजकर 31 तक रहेंगे उसके बाद मेष राशि में प्रवेश कर जायेंगे। इस प्रकार बुध 18 दिन 13 घंटे और 47 मिनट तक नीच राशिगत रहेंगे।
यह कालखंड पृथ्वी वासियों के लिए संयम और साहस की परीक्षा लेने वाला है क्योंकि वर्तमान समय में विश्व जिस कोरोना नामक महामारी से जूझ रहा है उसमें कहीं न कहीं बुध की भी भूमिका है क्योंकि, ज्योतिष शास्त्र में इन्हें उदर रोग, कंठ रोग, एलर्जी, त्वचा-चर्मरोग, छुआछूत की जैसी महामारियों के कारक कहे गये हैं। नैसर्गिक रूप से इन्हें शुभ ग्रह माना जाता है किन्तु जब ये अपनी नीच राशि में हो तो पाप देते हैं।
मिथुन एवं कन्या राशियों के स्वामी बुध की कन्या राशि उच्चराशिगत तथा मीन राशि नीचराशिगत संज्ञक मानी गयी है, ये आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र के स्वामी हैं। वर्तमान श्रीश्वेतवाराहकल्प के सातवें मनु 'वैवस्वत' की पुत्री इला से इनका विवाह हुआ। ये सूर्य और शुक्र के साथ मित्र भाव से तथा चंद्रमा से शत्रुतापूर्ण और अन्य ग्रहों के प्रति तटस्थ रहता है।
फलित ज्योतिष में इन्हें व्यापारियों का स्वामी एवं रक्षक भी माना जाता है क्योंकि ये बैंकिंग सेक्टर्स, बीमा, आईटी, शिक्षण कार्य, तर्क शास्त्र, लेखन, प्रकाशन, वकालत, एकाउंट्स, फार्मा, संचार, विश्लेषण, चेतना, विज्ञान, गणित, व्यापार और नेतृत्व प्रधान पद के कारक माने गए हैं। इनके गोचर काल के समय शुभा-शुभ राशियों एवं अन्य ग्रहों के साथ इनके द्वारा निर्मित योगों से स्टॉक मार्केट और दैनिक व्यापरियों के हानि-लाभ पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है विशेष तौर पर बैंकिंग सेक्टर्स, बीमा के क्षेत्र आई टी, फार्मा, भारी उद्योग के सेक्टर्स पर बुध का का सीधा प्रभाव पड़ता है, अतः इन सब सेक्टर्स में निवेश करने वाले निवेशकों को अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता रहेगी।
इंट्रा डे ट्रेडिंग पर इनका प्रभाव सर्वाधिक रहता है इसलिए 25 अप्रैल तक आपको निवेश के लिए जल्दबाजी अथवा अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि नीच अवस्था के गोचर काल में ये इन क्षेत्रों को सर्वाधिक प्रभावित करेंगे। स्वतंत्र भारत की बृषभ लग्न की जन्म कुंडली में ये द्वितीय धनभाव और पंचम विद्या-बुद्धि भाव के स्वामी हैं। मीन राशि लग्न गोचर से लाभभाव और भारतवर्ष की राशि कर्क से भाग्यभाव का प्रतिनिधित्व करती है अतः बुध इन भावों से सम्बंधित भागों को अत्यधिक नुकसान पहुचाने की कोशिश करेंगे। अभी भारत वर्ष की जन्म कुंडली में राहू की महादशा में बुध की अंतर दशा भी चल रही है अतः इस अवधि में सभी को अधिक सावधान रहने के सलाह दी जाती है।