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Kundali Mein Kalsarpa Dosh: कालसर्प दोष से ऐसी हो जाती है जिंदगी, नहीं मिलता संतान सुख
Fri, 16 Jun 2023 01:40 PM IST
श्वेता सिंह
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Fri, 16 Jun 2023 01:40 PM IST
सार
पराशर संहिता के अनुसार संतान भाव में स्थित राहु को मंगल अपनी पूर्ण दृष्टि से देखें अथवा राहु मेष या वृश्चिक राशि में हो तो संतान की हानि होती है। संतान भाव का स्वामी राहु के साथ कहीं भी हो तथा पंचम भाव में शनि हो और उस शनि को मंगल या चंद्रमा देखे या उससे युति करे तो भी संतान की हानि होती है।
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Kundli me Kaal sarp dosh
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Kundli me Kaal sarp dosh: ज्योतिषशास्त्र के अनुसार छाया ग्रह राहु और केतु के मध्य जब अन्य ग्रह आ जाते हैं यानी कि जब सूर्य चंद्रमा मंगल बुध गुरु शुक्र और शनि ये सातों ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित होते हैं तो कुंडली में कालसर्प योग बनता है । कालसर्प योग में जातक को कई दुष्परिणाम झेलने पड़ते हैं। उदाहरण स्वरूप उसे मानसिक कष्ट होता है, स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। उसे पैतृक संपत्ति प्राप्त नहीं होती। शिक्षा प्राप्त होने के बाद भी उसका उपयोग नहीं कर पाता। उसका गृहस्थ जीवन सुखी नहीं रहता यानी कुल प्रकार से कालसर्प योग के जो परिणाम है वह अशुभ ही माने गए हैं।
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12 प्रकार के कालसर्प योग में से पदम नाम का काल सर्प योग कुंडली के पंचम भाव से जुड़ा होता है। पंचम भाव संतान, शिक्षा, पूर्व जन्म के कर्म आदि का भाव है। इस योग के कारण संतान सुख में रुकावट आती है, शिक्षा में बाधा होती है और निरंतर चिंता और परेशानी के कारण जातक का जीवन संघर्ष में रहता है।
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पराशर संहिता के अनुसार संतान भाव में स्थित राहु को मंगल अपनी पूर्ण दृष्टि से देखें अथवा राहु मेष या वृश्चिक राशि में हो तो संतान की हानि होती है। संतान भाव का स्वामी राहु के साथ कहीं भी हो तथा पंचम भाव में शनि हो और उस शनि को मंगल या चंद्रमा देखे या उससे युति करे तो भी संतान की हानि होती है।
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संतान कारक ग्रह बृहस्पति राहु के साथ हो और पांचवें भाव का स्वामी कमजोर हो, लग्नेश मंगल के साथ हो तो भी संतान की हानि होती है। एक और योग के अनुसार गुरु व मंगल एक साथ हो लग्न में राहु स्थित हो और पंचम भाव का स्वामी छठे आठवें या द्वादश भाव में हो तो भी संतान की हानि होती है।
अब इसी चीज को हम एक उदाहरण कुंडली के माध्यम से समझते हैं। यह कुंडली वृषभ लग्न की है और इस जातक की कुंडली में पंचम भाव में केतु और ग्यारहवें भाव में राहु होने के कारण पदम नामक कालसर्प योग बना हुआ है। संतान भाव राहु केतु की धुरी में है। संतान भाव का स्वामी बुध द्वादश भाव में सूर्य के साथ है। राहु और चंद्रमा की युति यह भी दर्शाती है कि कालसर्प योग की तीव्रता अधिक है। पुत्र कारक बृहस्पति केतु के साथ है यानी कि गुरु राहु केतु की धुरी में है। शुक्र उच्च राशि में है लेकिन राहु के साथ है। चंद्र कुंडली से देखे तो पंचम चन्द्रमा राहु के साथ पीड़ित है तो यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि जातक को सर्प शाप के कारण संतान हीनता है। इस जातक को संतान सुख नहीं मिला।