Ahoi Ashtami 2019: ज्योतिशास्त्र के अनुसार जानिए कैसे इस व्रत को रखने से संतान की बदल जाती है किस्मत
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करवा चौथ के 4 दिन बाद कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत माताएं संतान के सुख और आयु वृद्धि की कामना हेतु रखती हैं। इस व्रत में मां गौरी की पूजा अर्चना करने का विधान है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार माता पार्वती संतान की रक्षा करने वाली हैं। इस व्रत में तारों को अर्ध्य दिया जाता है और उसके बाद ही व्रत तोड़ा जाता है। आइए आज जानते है इस व्रत का ज्योतिषय महत्व क्या है।
पंचम भाव बलिष्ठ होने से जातक के संतान संबंधी कष्ट दूर हो जाते हैं। वह जातक जिनका पंचम भाव या पंचमेश निर्बल है, उन्हें या तो संतान प्राप्ति में कष्ट होता है या भविष्य में संतान संबंधी कष्ट आता है। देवी गौरी के अहोई स्वरुप की पूजा करने से जातक का पंचम भाव बलिष्ठ होता है और संतान संबंधी कष्ट समाप्त हो जाता है।
आपको बता दें कि पंचम भाव जातक की विद्या बुद्धि का भी भाव भी होता है। खास बात यह है कि काल पुरुष की कुंडली में इस भाव के कारक ग्रह स्वयं ब्रहस्पति हैं। यानी की कुंडली में गुरु की ग्रह की स्थिति और उनका अच्छी व मित्र या फिर स्वराशि में होना या फिर पंचम भाव पर दृष्टि होने से जातक के संतान संबंधी कई तरह के कष्ट स्वयं नष्ट हो जाते हैं। यदि इस भाव पर गुरु ग्रह बैठे हों या फिर पांचवी, सातवी अथवा नौवी दृष्टि पड रही हो तो जातक की संतान बहुत बुद्धिमान, आज्ञाकारी और जीवन काल में हर तरह का फायदा पहुंचाने वाली होती है।