Chandra Grahan 2021: चंद्रग्रहण से जुड़ी जरूरी जानकारी, जानें समय, सूतक और प्रभाव
यह ग्रहण वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है। भारत में चंद्र ग्रहण उपछाया होगा, जिसका कोई सूतक नहीं होगा, इस दिन वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा भी है।
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साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई दिन बुधवार को पड़ रहा है। हालांकि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा लेकिन हिंदू धर्म में कई तरह की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि ग्रहण का जीवन में अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष तौर पर कोई न कोई प्रभाव जरूर पड़ता है। यह ग्रहण वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगने जा रहा है। भारत में चंद्र ग्रहण उपछाया होगा, जिसका कोई सूतक नहीं होगा, इस दिन वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा भी है। इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं है, बल्कि उपछाया चंद्रग्रहण लगने वाला है। उपछाया चंद्रग्रहण का कोई धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाता है।
यह चंद्र ग्रहण 26 मई को दोपहर 02:17 बजे से शुरू होगा और शाम 07:19 बजे पर होगा। यह उपछाया चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, उत्तरी यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के कुछ इलाकों में पूर्ण रुप से दिखाई देगा। भारत में यह चंद्रग्रहण उपछाया की तरह होगा। यह चंद्रग्रहण देश के पूर्वोत्तर भाग में और पश्चिम बंगाल के कुछ भाग में दिखाई पड़ेगा। देश के बाकी भागों में इस ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा। इसलिए कोई सूतक मान्य नहीं होगा।
पूर्ण और आंशिक ग्रहण के अलावा एक उपछाया ग्रहण भी होता है। चंद्रमा जब पृथ्वी की वास्तविक छाया में नहीं आता है और उसकी उपछाया से ही बाहर निकल जाता है, ऐसे ग्रहण को उपछाया ग्रहण कहते हैं। उपछाया ग्रहण को वास्तविक चंद्र ग्रहण नहीं माना जाता है। इस ग्रहण में चंद्रमा के रंग और आकार में भी कोई बदलाव नहीं होता है। केवल इसमें चंद्रमा पर एक धुंधली सी छाया नजर आती है।
चंद्रग्रहण वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगेगा। इस कारण इसका ज्यादा प्रभाव इसी राशि और नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों पर पड़ेगा। ऐसे में वृश्चिक राशि और मेष, वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला और धनु राशि वालों को वाणी और स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखना चाहिए। सिंह, मकर ,कुंभ ,मीन राशि के लिए शुभ परिणाम मिलेंगे।