Brihaspati Asta 2022: देवगुरु बृहस्पति हो रहे हैं अस्त, अब 53 दिन तक नहीं होंगे कोई मांगलिक कार्य
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कैसे अस्त होता है कोई ग्रह
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब सूर्य किसी ग्रह के करीब आता है तो उस ग्रह की शक्तियां कमजोर होने लगती हैं, इसे ही ग्रह का अस्त होना कहा जाता है। इस तरह सूर्य के देवगुरु बृहस्पति के करीब आने से गुरु बृहस्पति भी अस्त हो जाएंगे। शास्त्रों में देवगुरु बृहस्पति शुभ कार्यों के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए उनके अस्त होते ही शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।
24 मार्च तक अस्त रहेंगे बृहस्पति
देवगुरु बृहस्पति 24 फरवरी से 24 मार्च के बीच अस्त रहेंगे। इनके उदय होने से पहले ही 14 मार्च को मीन राशि में सूर्य ग्रह प्रवेश कर जाएंगे और 14 अप्रैल तक इसी राशि में रहने के कारण खरमास लग जाएगा। ऐसे में सभी मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे और विवाह भी नहीं होंगे। इस तरह 15 अप्रैल तक सभी शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। सिर्फ 4 मार्च को फुलेरा दूज होने की वजह से आप उस दिन कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। चूंकि फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए इस दिन आप कोई भी मांगलिक कार्य बगैर किसी ज्योतिष से परामर्श लिए भी कर सकते हैं।
धनु और मीन राशि पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव
देवगुरु बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी ग्रह हैं। 24 फरवरी को जब देवगुरु बृहस्पति अस्त होंगे तो इन राशियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में इन राशियों को नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए गुरु से संबंधित उपाय करने चाहिए। यदि संभव हो तो गुरुवार का व्रत रखें, चने की दाल, गुड़ आटे की लोई में डालकर और थोड़ी सी हल्दी डालकर गाय को खिलाएं। ऐसा करने से गुरु ग्रह का नकारात्मक प्रभाव काम हो सकता है।
अप्रैल से जुलाई तक सिर्फ 40 दिन होंगे विवाह
सूर्य के मीन राशि में होने से खरमास लगता है। इसलिए इस दौरान कोई मांगलिक कार्य नहीं होते। खरमास के बाद अप्रैल से जुलाई तक चार माह के बीच 40 दिन शहनाई बजेगी। अप्रैल में 08, मई में 14, जून में 11 और जुलाई में 07 दिन लग्न के शुभ मुहूर्त हैं। 10 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही चार माह के लिए विवाह संस्कार सहित मांगलिक कार्य फिर रुक जाएंगे और नवंबर में देवउठनी एकादशी के साथ पुनः आरंभ हो जाएंगे।