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भारतीय ज्ञान शोध संस्थान में लें एडमिशन और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ पवन सिन्हा गुरु जी से सीखें ज्योतिष विज्ञान के गुर
Thu, 27 Aug 2020 07:14 PM IST
विनोद शुक्ला
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Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 27 Aug 2020 07:14 PM IST
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डॉ पवन सिन्हा गुरुजी, भारतीय ज्ञान शोध संस्थान
- फोटो : सोशल मीडिया- Dr. Pawan Sinha Guru ji
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भारतीय ज्ञान शोध संस्थान एक ऐसा संस्थान है जो भारतीय ज्ञान की वैज्ञानिक परंपराओं को स्थापित करने का प्रयास है। जहां भारतीय प्राच्य विद्याओं जैसे-योग, ज्योतिष, आयुर्वेद, इतिहास, धर्म, दर्शन, संस्कृति एवं बच्चों तथा युवाओं के विकास से संबंधित विषयों में शोध होता है। साथ ही शोध पत्रों, जनरल पत्रिका, पुस्तकों व सीडी तथा ई-मैग्जीन का प्रकाशन भी करता है।
भारतीय ज्ञान शोध संस्थान की स्थापना परमपूज्य डॉ पवन सिन्हा गुरुजी द्वारा वर्ष 2010 में की गई थी। जिसमें श्रीगुरु जी के दिशा निर्देशन में यह संस्थान ज्योतिष प्रणव प्रथम वर्ष, ज्योतिष प्रभाकर द्वितीय वर्ष एवं ज्योतिष प्रवीण तृतीय वर्ष की कक्षाएं भी संचालित कर रहा है। यह विद्याएं गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार सिखाई जाती हैं जिसमें वस्त्रों से लेकर पढ़ने-पढ़ाने की शैली में भी परंपरा व अनुशासन दिखता है, साथ ही संस्थान का प्रयास है कि शंका समाधान-सत्र एवं अभ्यास कक्षाएं अधिक से अधिक हों, जिससे कि विद्यार्थी जन लाभान्वित हो सकें।
इस कोर्स में निम्नलिखित विषयों को पढ़ाया जाता है।
प्रथम वर्ष-ज्योतिष प्रणव
1- ज्योतिष का विस्तृत परिचय
2- कुंडली निर्माण
3- पंचांग मुहूर्त
4- अष्टक वर्ग
5- ग्रह गुणधर्म
6- राशि
7- भाव
8- नक्षत्र
9- सामुद्रिक शास्त्र आदि की विस्तृत जानकारी।
द्वितीय वर्ष-ज्योतिष प्रभाकर
1- ग्रहों के विभिन्न भाव एवं राशियों में फल
2- षड्बल
3- कुंडली मिलान
4- विवाह
5- संतान
6- व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी।
तृतीय वर्ष-प्रवीण
जिसमें विशेष रूप से शोध कार्य विषय-बाजार विश्लेषण, गोचर फल, चिकित्सीय ज्योतिष एवं उपाय खंड की विस्तृत जानकारी के साथ-साथ अभ्यास कक्षायें, परियोजना कार्य एवं परीक्षा आदि भी शामिल है।
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ये सारी कक्षाएं डॉ पवन सिन्हा "गुरु जी" व उनके मार्गदर्शन में योग्य आचार्यों द्वारा ली जाती हैं। इन कोर्स में प्रवेश लेने के लिए आप इन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं - 9412218955/56 (प्रातः 11 से 5 बजे तक)
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भारतीय ज्ञान शोध संस्थान की स्थापना परमपूज्य डॉ पवन सिन्हा गुरुजी द्वारा वर्ष 2010 में की गई थी। जिसमें श्रीगुरु जी के दिशा निर्देशन में यह संस्थान ज्योतिष प्रणव प्रथम वर्ष, ज्योतिष प्रभाकर द्वितीय वर्ष एवं ज्योतिष प्रवीण तृतीय वर्ष की कक्षाएं भी संचालित कर रहा है। यह विद्याएं गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार सिखाई जाती हैं जिसमें वस्त्रों से लेकर पढ़ने-पढ़ाने की शैली में भी परंपरा व अनुशासन दिखता है, साथ ही संस्थान का प्रयास है कि शंका समाधान-सत्र एवं अभ्यास कक्षाएं अधिक से अधिक हों, जिससे कि विद्यार्थी जन लाभान्वित हो सकें।
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प्रथम वर्ष-ज्योतिष प्रणव
1- ज्योतिष का विस्तृत परिचय
2- कुंडली निर्माण
3- पंचांग मुहूर्त
4- अष्टक वर्ग
5- ग्रह गुणधर्म
6- राशि
7- भाव
8- नक्षत्र
9- सामुद्रिक शास्त्र आदि की विस्तृत जानकारी।
द्वितीय वर्ष-ज्योतिष प्रभाकर
1- ग्रहों के विभिन्न भाव एवं राशियों में फल
2- षड्बल
3- कुंडली मिलान
4- विवाह
5- संतान
6- व्यवसाय आदि की विस्तृत जानकारी।
तृतीय वर्ष-प्रवीण
जिसमें विशेष रूप से शोध कार्य विषय-बाजार विश्लेषण, गोचर फल, चिकित्सीय ज्योतिष एवं उपाय खंड की विस्तृत जानकारी के साथ-साथ अभ्यास कक्षायें, परियोजना कार्य एवं परीक्षा आदि भी शामिल है।
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