पिथौरागढ़ जिले में आठूं पर्व आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मां गौरा और भगवान महेश्वर के विग्रहों की स्थापना के बाद जगह-जगह देर शाम तक खेल, ठुलखेल और झोड़ा-चांचरी का गायन हो रहा है। पिथौरागढ़ नगर के रामलीला मैदान में भी पारंपरिक लोकगीतों की धूम मची हुई है। शुक्रवार से रामलीला मैदान में स्कूली बच्चों की आठूं पर्व से संबंधित सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं शुरू हुईं। दोपहर में विभिन्न विद्यालयों के बच्चे पारंपरिक कुमाऊंनी परिधानों में कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद बेहतर खेल और झोड़ा-चांचरी गायन समेत विभिन्न प्रतियोगिताएं कराई गईं। पहले दिन चार विद्यालयों की टीमों ने प्रतिभाग किया। बच्चों की प्रतियोगिताओं के बाद महिलाओं और पुरुषों ने भी खेल प्रस्तुत किए। झोड़ा-चांचरी के सामूहिक गायन से रामलीला मैदान में लोक संस्कृति के रंग बिखर उठे। कार्यक्रम में नगर क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। खेलों का आनंद लेने के लिए रामलीला मैदान लोगों से खचाखच भरा रहा। इस अवसर पर यूकेडी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी, भाजपा प्रदेश मंत्री एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपिका बोहरा, आठूं महोत्सव समिति अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा, व्यवस्थापक दीपक गुप्ता, भाजपा नेता बीरेंद्र बोहरा समेत अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन दीवान सिंह वल्दिया और जनार्दन उप्रेती ने किया। रामगंगा घाटी में देर रात तक गूंजे पारंपरिक गीत रामगंगा घाटी क्षेत्र में भी आठूं पर्व की धूम मची हुई है। ढोलक की थाप पर पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और पुरुषों ने देर रात तक खेल, ठुलखेल और चांचरी का गायन किया। ''कै धूरी फूललौ मासी को फूल, शिखर भनार मासी को फूल...'' जैसे अनेक पारंपरिक गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कमतोली, दिगरा मुवानी, सिलचमूं, सुरौली, रीठा, पीपलतड़, दिगौटी, विनायक, स्यालवे, चिटगालगांव और कांडा समेत कई क्षेत्रों में पर्व उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। अस्कोट के देवल दरबार में भी पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं दोपहर बाद से देर शाम तक खेलों में शामिल हो रही हैं। पारंपरिक गीतों के सामूहिक गायन से क्षेत्र में लोक संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिल रही है। आठूं पर्व के उल्लास में बड़े-बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक उत्साहपूर्वक शामिल हो रहे हैं।