रामगंगा विहार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के दसवें और अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा कर पुण्य अर्जित किया। आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर महाराज ने कहा कि ब्रह्मचर्य केवल तन का संयम नहीं, बल्कि मन, वचन और भावों की पवित्रता है।