मथुरा। कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने मथुरा के साड़ी कारोबार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धागा, कपड़ा और अन्य जरूरी सामग्री महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका असर कारोबारियों के मुनाफे के साथ ही साड़ी निर्माण से जुड़े लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। मथुरा में साड़ी कारोबार से जुड़ी करीब 50 इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों की संख्या में मजदूर जुड़े हैं। कारोबारियों के मुताबिक कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के मुकाबले तैयार साड़ियों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं। वर्तमान समय में ऐसे में ग्रे कपड़े पर 2 से 5 रुपये तक की तेजी आई है, साथ ही रंग और केमिकल पर भी 40 प्रतिशत से अधिक रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण तैयार माल के दाम अचानक बढ़ाना आसान नहीं है। ग्राहक पहले की कीमतों में ही साड़ी खरीदना चाहते हैं, जबकि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें लगातार दबाव बना रही हैं। इससे छोटे और मध्यम कारोबारियों के सामने कारोबार चलाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।