राधाष्टमी के पावन अवसर पर गोवर्धन में आस्था का अपार सैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गिरिराज महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा की। ‘राधे-राधे’ और ‘जय गिरिराज महाराज’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। भक्तों ने परिवार सहित परिक्रमा की। कुछ लोग पैदल तो कुछ समूह में ‘राधे-राधे’ के भजन गाते हुए आगे बढ़ रहे थे। रात के समय रोशनी से जगमगाते मंदिर और चारों ओर फैली भीड़ ने पूरे गोवर्धन को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया। जहां एक ओर बरसाना में राधारानी के जन्मोत्सव पर लाखों भक्त जुटे, वहीं गोवर्धन में गिरिराज महाराज की शरण में आकर भक्तों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की। राधाष्टमी पर राधा-कृष्ण की संयुक्त आराधना और गिरिराज परिक्रमा से भक्तों का मानना है कि जीवन में प्रेम, सुख, शांति और कृपा प्राप्त होती है। पूरे दिन व रात गोवर्धन आस्था के रंग में रंगा रहा। लौटते समय भी भक्त ‘जय गिरिराज’ के उद्घोष करते नजर आए।