मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर कान्हा की नगरी मथुरा कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आ रही है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। चारों ओर ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं के चेहरे पर कान्हा के दर्शन की उत्सुकता और मन में भक्ति का भाव दिखाई दे रहा है। जन्माष्टमी पर मथुरा पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच अलग-अलग तरह की भक्ति और परंपराओं के नजारे देखने को मिल रहे हैं। हरियाणा के होडल से श्रद्धालुओं का एक समूह भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचा। समूह के सदस्यों ने बताया कि वे हर वर्ष जन्माष्टमी पर मथुरा आते हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करना उनके लिए विशेष आस्था का विषय है। श्रद्धालुओं ने बताया कि जन्मभूमि में कान्हा के दर्शन करने के बाद वे दही-हांडी की मटकी अपने साथ होडल लेकर जाते हैं। वहां मंदिर में विशेष आयोजन कर इसी मटकी को फोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मथुरा की पावन धरती से दही-हांडी की मटकी ले जाकर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी इस परंपरा को निभाना उनके लिए आस्था और आनंद का विषय है। होडल से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि मथुरा आकर जन्मभूमि में कान्हा के दर्शन करने का अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आने से ऐसा लगता है मानो स्वयं कान्हा की बाल लीलाओं के बीच पहुंच गए हों। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा की गलियों से लेकर मंदिरों तक भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालु कान्हा के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं और जन्मभूमि के दर्शन को अपनी यात्रा का सबसे बड़ा सौभाग्य मान रहे हैं।