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कानपुर: रामलीला में राम वनगमन लीला देख भावुक हुए श्रद्धालु

श्री रामलीला आयोजन समिति पाल्हेपुर के तत्वावधान में चल रही बीस दिवसीय रामलीला के दूसरे दिन राम वनगमन का मार्मिक मंचन किया गया, जिसे देख दर्शक भावुक हो उठे। मंचन में दिखाया गया कि रानी कैकेई के कोपभवन में जाने की सूचना पर राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचते हैं और नाराजगी का कारण पूछते हैं। कैकेई उन्हें पूर्व में दिए गए दो वरदानों की याद दिलाती हैं। राजा से वचन लेने के बाद कैकेई अपने पुत्र भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं, साथ ही शर्त रखती हैं कि राम राजसी वस्त्रों में नहीं बल्कि वल्कल वस्त्र धारण कर वन जाएंगे। कैकेई के मुख से यह सुनकर राजा दशरथ व्याकुल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ते हैं। वह कैकेई को बहुत समझाते हैं लेकिन कैकेई अपने हठ पर अडिग रहती हैं। राजा पूरी रात चिंता में बिता देते हैं। सुबह मंत्री सुमंत पूरी बात जानकर राम को कैकेई के पास ले जाते हैं। कैकेई कहती हैं कि राजा से दो वरदान लेने थे जो अच्छा लगा मांग लिया। इस पर राम कहते हैं कि वही पुत्र बड़भागी है जो माता-पिता के वचनों का मान रखे। इसके बाद राम पिता दशरथ से वन जाने की अनुमति लेने जाते हैं और फिर माता कौशल्या के पास पहुंचकर वनगमन की आज्ञा लेते हैं। इस दौरान सीता और लक्ष्मण भी लाख समझाने के बावजूद राम के साथ वन जाने की जिद पर अड़े रहते हैं। अंततः राम उन्हें साथ चलने की अनुमति दे देते हैं। अगली सुबह वल्कल वस्त्रों में राम, सीता और लक्ष्मण को देख राजा दशरथ मंत्री सुमंत को आदेश देते हैं कि वह रथ लेकर जाएं और वन दिखाकर तीनों को वापस ले आएं। राम के वनगमन की खबर सुनकर बालक और वृद्धों को छोड़कर समस्त अयोध्यावासी उनके साथ चल पड़ते हैं और प्रथम दिन तमसा नदी के तट पर विश्राम करते हैं।

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