कानपुर के आनंदपुरी स्थित जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना श्रद्धा और उल्लास के साथ की गई। सुबह से ही भक्तों का मंदिर में तांता लगा रहा। भगवान के अभिषेक और शांतिधारा के बाद आगरा से आए पंडित राकेश जी ने संगीतमय पूजन कराया और तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया। पंडित जी ने कहा कि क्रोध ही समस्त अनर्थों की जड़ है और आत्मा के स्वाभाविक रूप में स्थिर होना ही सच्ची क्षमा है।