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VIDEO: जहां बसा था गांव वहां बह रही नदी, सरयू के रौद्र रूप से हेतमापुर का वजूद खतरे में

सरयू नदी से करीब आधा किमी हेतमापुर गांव में 1100 साल पुराना बाबा नारायण दास का धाम नदी के मुहाने पर है। आसपास के लोग अपने मकानों की ईंटे निकालकर ले जाते दिखे। उनका कहना था कि कम से कम ईटें बहने से तो बचा लें। कुछ दूर तक नजर दौड़ाने पर घरों की टूटी दीवारें और कटे खेत दिखाई देते हैं। जहां कभी आबादी थी, वहां अब नदी बह रही है। हेतमापुर में यह मंजर एक-दो दिन का नहीं है। बीते एक महीने में करीब 70 मकान और 800 बीघा जमीन सरयू में समा चुकी है। गांव का करीब आधा हिस्सा नदी की धारा में चला गया है। घरों में बचे लोग अब सामान समेट रहे हैं। कोई चारपाई निकाल रहा है, कोई अनाज और जरूरी सामान सुरक्षित जगह पहुंचा रहा है। हर परिवार की नजर नदी पर है। कुछ दिन पहले जहां घर था, आज वहां नदी है जगदीश, अशोक, बकरीद और आरिफ समेत कई ग्रामीणों के मकान कटान में खत्म हो चुके हैं। मौके पर खड़े ग्रामीण बताते हैं कि नदी हर दिन कुछ कदम आबादी की ओर बढ़ रही है। खेतों की मेड़ टूट रही है और उसके साथ जमीन पानी में उतरती जा रही है। सरयू की धारा ने गांव के कई पहचान चिह्न भी मिटा दिए। पुराना टेलीफोन एक्सचेंज, हनुमान मंदिर, उप स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल, बाबा उदित नारायण दास और उनकी पत्नी की समाधि, शंकरजी का मंदिर, ईदगाह और मस्जिद समेत कई सरकारी और धार्मिक स्थल अब नदी में समा चुके हैं। सोमवार रात आंखों के सामने समा गया समाधि स्थल सोमवार देर रात करीब 30 साल पुराना महंत गुरु नारायण दास का समाधि स्थल भी सरयू की तेज धारा में समा गया। ग्रामीणों के मुताबिक पहले जमीन में दरारें पड़ीं, फिर कटान बढ़ा और देखते ही देखते पूरा हिस्सा नदी में चला गया। अब बाबा नारायण दास के समाधि स्थल और मंदिर पर भी खतरा मंडरा रहा है। सरयू की धारा समाधि स्थल से बिल्कुल सटकर बह रही है। मंदिर के नीचे से पानी गुजर रहा है। परिसर फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन नीचे की जमीन लगातार कट रही है। नदी रोकने की कोशिश, लेकिन धारा बेअसर किनारे पर बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य दिखाई देता है। जगह-जगह सामग्री डालकर नदी की धारा रोकने की कोशिश की जा रही है। लेकिन तेज बहाव में मिट्टी और सामग्री के साथ किनारा भी टूटता जा रहा है। ग्रामीण बकरीद कहते हैं कि अधिकारी लगातार सामग्री डाल रहे हैं, लेकिन कटान रुक नहीं रहा। जगदीश के मुताबिक बचाव कार्य में लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, इसके बावजूद नदी गांव को लगातार काट रही है। चारों तरफ पानी, नाव ही सहारा हेतमापुर से आगे बढ़ने पर सुंदरनगर, कोडरी, बेलहरी, बाबापुरवा, सरसंडा, मदरहा, लालपुरवा और कोइलीपुरवा गांव भी पानी से घिरे दिखाई देते हैं। कई रास्ते डूब चुके हैं। सड़क संपर्क टूटने के बाद नाव ग्रामीणों की जिंदगी की डोर बनी हुई है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग नाव से आवागमन कर रहे हैं। जरूरी सामान लेने के लिए भी पानी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है। हेतमापुर में सरयू सिर्फ खेत और मकान नहीं काट रही। गांव की पहचान, धार्मिक स्थल और वर्षों पुरानी बसावट भी उसके साथ बह रही है। नदी की धारा लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है और किनारे खड़े ग्रामीणों की निगाह अब अपने बचे हुए घरों पर टिकी है।

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