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अयोध्या: विहिप के 62वें स्थापना दिवस पर चंपतराय ने जीवों की रक्षा और हिंदुओं की वापसी पर जोर दिया

मधुवेंद्र सचान Updated Mon, 07 Sep 2026 06:02 PM IST

अयोध्या: कारसेवक पुरम स्थित भारतकुटी सभागार में विश्व हिन्दू परिषद के 62वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद विहिप के उपाध्यक्ष चंपतराय, महंत राज कुमार दास, हरिशंकर और विक्रमा। भारत की धरती पर एक तकबा ऐसा है लोगों से सादे पेपर अंगूठा लगवाने का काम करती थी। चंपत राय ने कहा कि हिन्दू का अर्थ केवल हिंदुओं की रक्षा करना ही नहीं है अयोध्या में बंदरों की सेव करना चाहिए, सभी जीवों की रक्षा करने के लिए ही विश्व हिन्दू परिषद की गठन हुआ। जिन देशों में हिंदू रह रहे है वहां के कानून और नियम को मानते हुए वहां मंदिर बनाना चाहिए। आंदोलन के समय के हिंदुओं के 200 लोगों पत्र लिखकर बुलाया गया था और धमका था। जो हिंदू अपना घर छोड़ के चले गए है उन्हें सम्मान पूर्वक वापस लाना चाहिए। विश्व हिन्दू परिषद का 62वां स्थापना दिवस कारसेवक पुरम स्थित भारतकुटी सभागार में मनाया गया। इस अवसर पर विहिप उपाध्यक्ष चंपतराय ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने संगठन के मूल उद्देश्यों और वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार रखे। चंपतराय ने कहा कि हिन्दू होने का अर्थ केवल हिंदुओं की रक्षा करना नहीं है। उन्होंने अयोध्या में बंदरों की सेवा करने का भी उल्लेख किया। विहिप का गठन सभी जीवों की रक्षा के लिए हुआ है। उन्होंने भारत की धरती पर एक ऐसे तबके का जिक्र किया जो लोगों से सादे कागज पर अंगूठा लगवाता था। चंपतराय ने विदेशों में रह रहे हिंदुओं को वहां के कानून और नियमों का पालन करते हुए मंदिर बनाने की सलाह दी। उन्होंने आंदोलन के समय 200 हिंदुओं को पत्र लिखकर धमकाने की बात भी कही। विहिप उपाध्यक्ष ने उन हिंदुओं की सम्मानपूर्वक वापसी का आह्वान किया जो अपना घर छोड़कर चले गए हैं। कार्यक्रम में महंत राज कुमार दास, हरिशंकर और विक्रमा भी मौजूद थे। विहिप के उद्देश्यों पर प्रकाश कारसेवक पुरम के भारतकुटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विहिप उपाध्यक्ष चंपतराय ने संगठन के व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व हिन्दू परिषद का कार्यक्षेत्र केवल मानव हिंदुओं तक सीमित नहीं है। संगठन का मूल उद्देश्य सभी जीवों की रक्षा करना है। इसमें अयोध्या में बंदरों की सेवा करना भी शामिल है, जो इस व्यापक दृष्टिकोण का एक उदाहरण है। विस्थापित हिंदुओं की वापसी का आह्वान चंपतराय ने अपने संबोधन में कुछ ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारत में एक ऐसे समूह की बात की जो सादे कागजों पर लोगों के अंगूठे लगवाता था। इसके साथ ही, उन्होंने आंदोलन के दौरान 200 हिंदुओं को पत्र लिखकर धमकाए जाने की घटना का भी जिक्र किया। विहिप उपाध्यक्ष ने उन हिंदुओं की सम्मानजनक वापसी पर जोर दिया जो विभिन्न कारणों से अपना घर छोड़कर चले गए हैं। उन्होंने विदेशों में रहने वाले हिंदुओं को स्थानीय कानूनों का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण करने की सलाह भी दी।

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