आगरा के रुनकता कस्बे में बंदरों के उत्पात के कारण 50 वर्षीय शरीफ की जान चली गई। 4 सितंबर को बंदरों ने उनका टिफिन छीन लिया था। टिफिन वापस लेने के लिए पीछा करते समय वह छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 15 दिनों तक जीवन-मौत से जूझते हुए शुक्रवार की रात इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। मोहल्ले के बबलू ने बताया कि शरीफ बंदरों का पीछा करते हुए छत से गिर गए थे। तभी से उनका उपचार चल रहा था। बताया कि रुनकता और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों का उत्पात लंबे समय से बना हुआ है। आए दिन बंदरों के झुंड आबादी वाले इलाकों में पहुंचकर लोगों का सामान छीन लेते हैं और घरों में घुसकर उत्पात मचाते हैं। बंदरों के कारण कई लोग घायल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शहरी इलाकों से लोग वाहनों में भरकर बंदरों को रुनकता क्षेत्र की जंगल में छोड़ जाते हैं। जंगल में बंदरों के भोजन पानी नहीं है और वहां केवल बबूल के पेड़ ही हैं। भोजन की तलाश में बंदर जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं और लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हैं।