दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों के चाक की रफ्तार बढ़ गई है। हर घर को रौशन करने की आस में कारीगर दिन-रात मेहनत करके दीये तैयार कर रहे हैं। बोदला निवासी रमाशंकर (70) बताते हैं कि उनके यहां पारंपरिक काम कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। वे महज 12 साल की उम्र से ही मिट्टी के बर्तन और दीये बना रहे हैं। बढ़ती उम्र के बावजूद उनका जज्बा कम नहीं हुआ है। रमाशंकर का कहना है कि जब उनके बनाए दीयों से लोगों के घर जगमगाते हैं, तो उनकी सारी थकान मिट जाती है।