हिमालय की समृद्ध विरासत, इतिहास, कला और पुरातत्व को समझने और उसके संरक्षण को लेकर शिमला में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। चौड़ा मैदान स्थित राज्य संग्रहालय में आयोजित इस सम्मेलन का विषय “हिमालय का इतिहास, कला, पुरातत्व और संस्कृति-निरंतरता, परिवर्तन और संरक्षण” रखा गया है। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हिमालय को केवल एक पर्वत श्रृंखला के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह सदियों से विकसित होती रही एक जीवंत संस्कृति और समृद्ध विरासत का भी प्रतीक है। हिमालय के इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है। राकेश कंवर ने कहा कि आधुनिकता के दौर में हिमालयी संस्कृति में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। ऐसे में इन बदलावों को समझना और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को अपनी विरासत और परंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन शोधकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं, जहां हिमालय के इतिहास, कला, पुरातत्व और संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। इससे हिमालयी विरासत के संरक्षण को लेकर नए विचार और शोध सामने आने की उम्मीद है। सम्मेलन में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में हिमालय के अतीत, वर्तमान में हो रहे सांस्कृतिक बदलाव और विरासत के संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा और संवाद होगा।