डाक टिकटों की दुनिया सिर्फ इतिहास और संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के ज्ञान, कल्पना और अभिव्यक्ति को भी नई उड़ान दे सकती है। शिमला में आयोजित जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी सिम्पेक्स के दूसरे दिन कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। स्कूली छात्रों के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों ने अपनी प्रतिभा का खुलकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी के दूसरे दिन सुबह प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाई गई। इसमें शहर के 12 स्कूलों के 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में छात्रों से डाक टिकटों के साथ-साथ सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे गए। बच्चों ने उत्साह के साथ सवालों के जवाब दिए और अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही डिक्लेमेशन यानी वाद-विवाद/भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें 14 स्कूलों के 23 छात्रों ने भाग लिया। छात्रों ने अपने विचारों को प्रभावशाली तरीके से सामने रखते हुए अपनी वाक्पटुता और आत्मविश्वास का परिचय दिया। मंच पर बोलते हुए छात्रों के लिए यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने का भी मौका रहा। अलग-अलग स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लिया। दूसरे दिन चित्रकला प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही। छात्रों ने अपनी कल्पना और रचनात्मकता को कागज पर रंगों के माध्यम से उतारा। प्रतियोगिता में बच्चों की कला और उनकी सोच की झलक देखने को मिली। डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य बच्चों में डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि बढ़ाना है। डाक टिकटों के जरिए बच्चे इतिहास और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझ सकते हैं। सिम्पेक्स के दूसरे दिन की प्रतियोगिताओं ने यह भी दिखाया कि डाक टिकटों की छोटी-सी दुनिया में बच्चों के लिए सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने की बड़ी संभावनाएं छिपी हैं। क्विज में ज्ञान की परीक्षा हुई, मंच पर बोलने का आत्मविश्वास नजर आया और चित्रकला में बच्चों की कल्पना रंगों के जरिए सामने आई।