बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से लुधियाना में चल रही श्री हनुमंत कथा के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर मुस्लिम और ईसाई समुदाय की ओर से एतराज जताए गए हैं। अब शास्त्री ने अपनी बात स्पष्ट की है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वह न तो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हैं और न ही ईसाई समुदाय के। उनका विरोध केवल गलत तरीके से हो रहे धर्मांतरण के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हम तनातनी नहीं, सनातनी करते हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि गुरु परंपराओं को आगे बढ़ाना सिख समुदाय का धर्म है। जब वह किसी को अपनी परंपरा और धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में जाते देखते हैं तो उन्हें पीड़ा होती है। उन्होंने कहा कि वह इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित कई देशों में जाकर भी दूसरे धर्मों के लोगों के बीच प्रवचन करते हैं और वहां भी उन्हें सम्मान मिलता है। उनके अनुसार, इससे स्पष्ट है कि उनका विरोध किसी धर्म से नहीं, बल्कि धर्मांतरण से है। ‘पंजाब अपने बच्चों और संस्कृति को बचा लो’ धीरेंद्र शास्त्री ने पंजाब के लोगों से अपने बच्चों और संस्कृति को बचाने की अपील करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां और पूर्वज सवाल करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके विरोध की बात करते हैं, लेकिन वह सनातन की एकजुटता के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मरना मंजूर है, लेकिन धर्मांतरण स्वीकार नहीं है। उन्होंने पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं से कहा कि यदि उनकी बातें सही लग रही हैं तो वे कथा में बैठे रहें और यदि गलत लगती हैं तो चले जाएं। उन्होंने कहा कि धर्म हमारा धंधा नहीं है। साथ ही कहा कि कई ताकतें उनके पीछे लगी रहती हैं, लेकिन उन्हें अपने सनातनी समाज पर भरोसा है।