पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत और बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंंद ने सोमवार को फिरोजशाह में नवीनीकृत एंग्लो-सिख युद्ध संग्रहालय का उद्धघाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि फिरोजशाह की ऐतिहासिक धरती सिख सैनिकों की बहादुरी, वीरता और बलिदान की गवाह है। यह संग्रहालय 1845-46 और 1848-49 के एंग्लो-सिख युद्धों में लड़ने वाले योद्धाओं की याद को समर्पित है। मंत्री ने बताया कि करीब 50 वर्ष बाद पंजाब सरकार ने लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय का नवीनीकरण करवाया है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के साथ आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक इतिहास पहुंचाना है। संग्रहालय की तीन मंजिलों को ‘उभार’, ‘संघर्ष’ और ‘विरासत’ के रूप में ऐतिहासिक यात्रा की तर्ज पर तैयार किया गया है। यहां सिख राज्य, महाराजा रणजीत सिंह और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के उदय के साथ एंग्लो-सिख युद्धों की घटनाओं को भित्ति चित्रों, एनिमेटेड नक्शों, प्रोजेक्शन, टच पैनल, डिजिटल डिस्प्ले और ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया गया है। मुदकी, फिरोजशाह, सभराऊं और चेलियांवाली की लड़ाइयों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। प्रसिद्ध चित्रकार कृपाल सिंह के चार ऐतिहासिक चित्रों को संरक्षित करते हुए प्रदर्शनी का हिस्सा बनाया गया है।