गुलज़ार सिंह की मौत के बाद जिस तरह उसका अंतिम संस्कार किया गया उससे गांव के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला । ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस-प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय मामले को जल्दबाजी में रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब परिजनों को अंतिम बार गुलज़ार सिंह का चेहरा देखने की इजाजत तक नहीं दी गई। इससे गुस्साए ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और श्मशान घाट पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो उठा। आक्रोशित लोगों ने विरोध दर्ज कराते हुए एक बार तो चिता पर सजाई गई लकड़ियां उठाकर फेंक दीं। चारों तरफ नारेबाजी और गहमागहमी की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया ।