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Punjab Election 2027: क्या डेरों और आस्था से तय होगी सत्ता की चाबी? जानिए पूरा सियासी समीकरण

Wed, 02 Sep 2026 03:56 PM IST
Chandra Prakash Neeraj Video Desk Amar Ujala Dot Com

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही सूबे के सियासी गलियारों में यह सवाल फिर से तैरने लगा है कि क्या आस्था ही आने वाले चुनाव में पंजाब की सत्ता का रास्ता तय करेगी? करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी और समाज के विभिन्न वर्गों में डेरों की गहरी सामाजिक पैठ के कारण राज्य में राजनीति और धार्मिक आस्था का गठजोड़ हमेशा से एक बेहद संवेदनशील और अहम पहलू रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव में डेरावाद एक असरदार कारक जरूर रहेगा लेकिन केवल इसके दम पर चुनावी नतीजे तय होना अब मुमकिन नहीं दिखता है। मतदाता अब अन्य मुद्दों पर अपने स्थानीय और प्रासंगिक मुद्दों को प्राथमिकता देने लगे हैं। पंजाब का भौगोलिक और सामाजिक समीकरण इस सियासी खेल को बेहद दिलचस्प बनाता है। 117 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र से आती हैं, जहां डेरा सच्चा सौदा समेत कई प्रमुख संप्रदायों का अनुयायी आधार काफी मजबूत माना जाता है। दूसरी ओर दोआबा क्षेत्र में रविदासिया समुदाय से जुड़े डेरा सचखंड बल्लां का गहरा सामाजिक प्रभाव है, जो दलित राजनीति और सामाजिक चेतना के केंद्र में रहता है। इसके ठीक विपरीत, माझा क्षेत्र में अकाल तख्त साहिब और पारंपरिक सिख पंथक सोच का दबदबा अधिक है, जहां गैर-सिख या विवादित डेरों का प्रभाव बेहद सीमित रहता है।

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