शहर में आयोजित ‘कवि आए हैं शहर में’ कार्यक्रम में हास्य और कविता की महफिल सजी। कार्यक्रम के दौरान कवि अनिल अग्रवंशी से खास बातचीत हुई, जिसमें उन्होंने हास्य कविता, अपने संघर्ष और मंच तक पहुंचने के सफर से जुड़े अनुभव साझा किए। अनिल अग्रवंशी ने कहा कि हास्य रस नौ रसों में से एक है। उन्होंने बताया कि लोगों को हंसाना आसान नजर आता है, लेकिन एक हास्य कवि के पीछे कई व्यक्तिगत अनुभव और संघर्ष भी जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार इंसान अपनी भीतर की परेशानियों को दबाकर भी दूसरों को हंसाने का काम करता है। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए अनिल अग्रवंशी ने बताया कि उन्हें पहली बार कविता के लिए 3100 रुपये मिले थे। उन्होंने कहा कि वह रकम उनके लिए खास थी और इससे उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने का हौसला मिला। उन्होंने अपने करियर में टेलीविजन शो ‘वाह-वाह क्या बात है’ को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, इस शो के जरिए उन्हें व्यापक पहचान मिली और देशभर के दर्शकों तक उनकी कविताएं पहुंचीं।