जिले की अनाज मंडियों में वीरवार सुबह हुई बारिश ने धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। मंडियों में बोरियों में रखा और खुले में पड़ा करीब ढाई लाख मीट्रिक टन धान बारिश में भीग गया। किसानों और आढ़तियों ने इसके लिए खरीद एजेंसियों तथा ट्रांसपोर्टर को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यदि मंडियों में पहुंचते ही धान की खरीद और समय पर उठान हो जाता, तो किसानों की छह महीने की मेहनत से तैयार फसल को इस तरह नुकसान नहीं उठाना पड़ता। आढ़तियों के अनुसार, मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन खरीद और उठान की रफ्तार उसके मुकाबले काफी धीमी है। इसके चलते बड़ी मात्रा में धान खुले में और बोरियों में पड़ा हुआ है। वीरवार सुबह हुई बारिश के कारण किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ गई।