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शिवपुरी: अनर्गल बयानबाजी पर नरोत्तम मिश्रा की चेतावनी, बोले- ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी न समझें

Mon, 28 Sep 2026 01:16 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी

भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी में आयोजित अखिल भारतीय ब्राह्मण सम्मान समारोह में ब्राह्मण समाज के सम्मान, स्वाभिमान और एकता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के खिलाफ लगातार अनर्गल टिप्पणियां की जा रही हैं लेकिन समाज संयम से काम ले रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी।

मिश्रा ने कहा कि वर्तमान कलयुग में एक ही शरीर में देव और दानव दोनों निवास करते हैं। कुछ लोगों में दानव जाग गया है, इसलिए वे ब्राह्मणों के खिलाफ अनर्गल बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज को संयम बनाए रखना चाहिए लेकिन जब बात सम्मान और स्वाभिमान की हो तो पीछे नहीं हटना चाहिए। पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि हम भगवान परशुराम के वंशज हैं। हमें शास्त्र और शस्त्र दोनों का ज्ञान है। उन्होंने कहा कि ज्यादा खामोशी भी ठीक नहीं होती क्योंकि लगातार खामोशी कमजोरी में बदलने लगती है। इसलिए सम्मान और स्वाभिमान पर चोट हो तो समाज को मुकाबले के लिए तैयार रहना चाहिए।

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इस दौरान डॉ. मिश्रा ने एक कविता की पंक्तियां भी सुनाईं-  
युद्ध नहीं जिनके जीवन में, 
वे भी बड़े अभागे होंगे
या तो रण को टाला होगा
या तो रण से भागे होंगे। 
ब्राह्मण समाज के खिलाफ टिप्पणियों का जिक्र करते हुए मिश्रा ने सांप और जुगनू का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जुगनू ने सांप से पूछा कि जब उससे कोई दुश्मनी नहीं है, वह उसकी खुराक भी नहीं है, फिर वह उसके पीछे क्यों पड़ा है। इस पर सांप ने कहा कि उससे जुगनू की चमक नहीं देखी जाती। मिश्रा ने कहा कि कुछ ऐसा ही इस समय ब्राह्मण समाज के साथ हो रहा है।

मिश्रा ने ब्राह्मणों पर शोषण के आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कालखंडों में देश पर अलग-अलग राजवंशों और शासकों का शासन रहा लेकिन ब्राह्मण कभी शासक नहीं रहे। ऐसे में उन पर हमेशा शोषण करने का आरोप लगाने का आधार क्या है, इसका जवाब भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने समाज की एकता पर जोर देते हुए कहा कि ब्राह्मणों को सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज जैसे वर्गों में बंटने के बजाय एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही आगे बढ़ता है और सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करता है। मिश्रा ने ब्राह्मण समाज से छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर एक साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं को याद रखते हुए फिर से समाज को नई दिशा दिखाने की भूमिका निभानी होगी।

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