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सीहोर के चमत्कारी चिंतामन गणेश: उल्टा स्वास्तिक से मांगते हैं मन्नत, पूरी होने पर बनाते हैं सीधा

Mon, 14 Sep 2026 06:03 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सीहोर की पहचान केवल ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि भगवान गणेश की अद्भुत आस्था से भी जुड़ी है। शहर में स्थित प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर श्रद्धालुओं के लिए ऐसा पवित्र धाम है, जहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और विश्वास के साथ गणेशजी के चरणों में अपनी चिंता छोड़ देते हैं। करीब दो हजार वर्ष पुराने इस मंदिर की परंपराएं और मान्यताएं आज भी श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था जगाती हैं।

देश के चार स्वयंभू गणेश स्थलों में शामिल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देश में चिंतामन सिद्ध गणेश की चार प्रमुख स्वयंभू प्रतिमाएं मानी जाती हैं। इनमें राजस्थान का रणथंभौर, मध्यप्रदेश का उज्जैन, गुजरात का सिद्धपुर और सीहोर का चिंतामन गणेश मंदिर शामिल है। सीहोर की प्रतिमा की विशेषता यह है कि भगवान गणेश की प्रतिमा का एक हिस्सा जमीन में धंसा हुआ है। यही स्वरूप इस मंदिर को अन्य गणेश मंदिरों से अलग और विशेष बनाता है।

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सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ी है कथा
मंदिर के इतिहास को लेकर प्रचलित मान्यता इसे सम्राट विक्रमादित्य के समय से जोड़ती है। कहा जाता है कि करीब दो हजार वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य सीवन नदी से कमल पुष्प लेकर अपने रथ से लौट रहे थे। सुबह होने पर उनका रथ अचानक एक स्थान पर जमीन में धंस गया। मान्यता है कि उसी स्थान पर कमल पुष्प भगवान गणेश की प्रतिमा के रूप में प्रकट हुआ और प्रतिमा का आधा हिस्सा भूमि में समा गया। इसके बाद राजा ने यहां मंदिर का निर्माण कराया।

श्रीयंत्र की संरचना में मंदिर
धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 155 में श्रीयंत्र की संरचना के अनुरूप कराया गया था। समय के साथ अनेक शासकों और राजवंशों ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। बाजीराव पेशवा प्रथम, राजा भोज, कृष्ण राय और गौंड राजा नवल शाह सहित कई शासकों के योगदान का उल्लेख मंदिर के इतिहास से जुड़ी कथाओं में मिलता है। यही कारण है कि यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

हीरे के नेत्रों से चांदी के नेत्रों तक
चिंतामन गणेश की प्रतिमा से जुड़ी एक और रोचक मान्यता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। कहा जाता है कि करीब 150 वर्ष पहले प्रतिमा की आंखों में जड़े हीरे चोरी हो गए थे। इसके बाद लगातार 21 दिनों तक प्रतिमा की आंखों से दूध की धारा बहने की मान्यता है। कहा जाता है कि भगवान गणेश ने पुजारी को स्वप्न में दर्शन देकर चांदी के नेत्र लगाने का आदेश दिया। तभी से प्रतिमा की आंखों में चांदी के नेत्र विराजमान हैं।

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उल्टा स्वास्तिक बनाकर मांगते हैं मनोकामना
मंदिर की सबसे अनोखी परंपराओं में उल्टा स्वास्तिक बनाना शामिल है। श्रद्धालु भगवान गणेश के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। मान्यता है कि जब उनकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वे दोबारा मंदिर पहुंचकर वहां सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। इस परंपरा के पीछे भक्तों का विश्वास है कि चिंतामन गणेश जीवन की चिंताओं और बाधाओं को दूर करते हैं।

84 सिद्धों की साधना से जुड़ी मान्यता
चिंतामन गणेश मंदिर को सिद्धियों की भूमि भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर 84 सिद्धों और तपस्वियों ने साधना कर सिद्धि प्राप्त की थी। इसी कारण यहां विराजमान भगवान को चिंतामन सिद्ध गणेश कहा जाता है। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि विश्वास, साधना और मन की शांति का केंद्र है।

12 दिनों तक होगा गणेश उत्सव
मंदिर के पुजारी पंडित पृथ्वी बल्लभ दुबे ने बताया कि इस वर्ष गणेश उत्सव 14 सितंबर से 25 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। सामान्य तौर पर गणेश उत्सव दस दिनों का होता है, लेकिन इस बार विशेष संयोग के चलते उत्सव 12 दिनों तक मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रतिदिन भगवान गणेश का अलग-अलग और आकर्षक शृंगार किया जाएगा।

दोपहर 12 बजे हुई महाआरती
सोमवार को गणेश उत्सव के शुभारंभ के साथ ही सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर 12 बजे विधि-विधान के साथ महाआरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर धर्मलाभ लिया। पंडित जय दुबे के अनुसार, उत्सव के प्रत्येक दिन भगवान के अलग स्वरूप का शृंगार भक्तों के दर्शन के लिए किया जाएगा।

आस्था के साथ उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब
गणेश उत्सव के इन दिनों में मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का विशेष वातावरण रहेगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु चिंतामन गणेश के दर्शन कर अपनी मनोकामना मांगेंगे। किसी के लिए यह सुख-समृद्धि की प्रार्थना है, किसी के लिए परिवार की खुशहाली की, तो कोई जीवन की परेशानियों से मुक्ति की आस लेकर पहुंचता है। यही अटूट विश्वास सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर को भक्तों की आस्था का अद्भुत केंद्र बनाता है।   प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर   चिंतामन गणेश
  दर्शन के लिए उमड़े भक्त। 

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