त्योहारों का मौसम है, बाजारों में रौनक होनी चाहिए, घरों में रोशनी और गांवों में खेती-किसानी के कामों को रफ्तार मिलनी चाहिए, लेकिन सीहोर जिले में बिजली संकट ने पूरे माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। शहर से लेकर गांवों तक अघोषित बिजली कटौती, बार-बार ट्रिपिंग और अनियमित आपूर्ति ने लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया है। कहीं किसान रातभर बिजली का इंतजार कर रहे हैं, कहीं ग्रामीणों को सड़क पर उतरकर चक्काजाम करना पड़ रहा है, तो कहीं कांग्रेस विद्युत वितरण कंपनी का पुतला फूंककर विरोध जता रही है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल अब केवल घरेलू परेशानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती, व्यापार, पेयजल और प्रशासनिक जवाबदेही तक पहुंच गए हैं।
उधर, बिजली कंपनी की अधीक्षण यंत्री ने कटौती के पीछे पावर मैनेजमेंट के निर्देशों का हवाला देते हुए 15 अक्टूबर तक राहत मिलने की उम्मीद जताई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि त्योहारों के बीच जनता को राहत कब मिलेगी और बिजली संकट की जवाबदेही कौन तय करेगा?
शहर से गांव तक कटौती की मार, त्योहारों की तैयारियों पर संकट
जिले में बिजली आपूर्ति की अनियमितता से आम उपभोक्ताओं के साथ दुकानदार, किसान, विद्यार्थी और ग्रामीण परिवार परेशान हैं। लोगों की शिकायत है कि बिना स्पष्ट पूर्व सूचना के बिजली बंद होने और बार-बार आने-जाने से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। त्योहारों के दौरान घरों में रोशनी, दुकानों में कारोबार और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही के लिए निर्बाध बिजली जरूरी है। इसके बावजूद कटौती ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बार-बार ट्रिपिंग और वोल्टेज की समस्या से उपकरणों पर खतरा
उपभोक्ताओं की चिंता केवल बिजली गुल होने तक सीमित नहीं। बार-बार बिजली आने-जाने और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की शिकायतों से घरेलू उपकरणों और दुकानों में लगे इलेक्ट्रॉनिक सामान की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि तकनीकी खराबी के कारण ऐसी स्थिति बन रही है, तो उसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि, उपकरणों के नुकसान और उसकी जिम्मेदारी को लेकर स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
केस-1: बरखेड़ी में 25 गांवों के किसानों का प्रदर्शन
सीहोर के बरखेड़ी विद्युत सब स्टेशन पर 25 गांवों के किसानों ने रात में बिजली कटौती और झूलते 11 केवी तारों के विरोध में प्रदर्शन किया। किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने विद्युत अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर कार्रवाई की मांग की। किसानों का आरोप है कि रात आठ बजे से सुबह तक कटौती के कारण उन्हें छह से सात घंटे बिजली नहीं मिल पाती। इससे सिंचाई प्रभावित होती है और खेती-किसानी के काम बाधित होते हैं। किसानों ने विद्युत दुर्घटनाओं की जांच कराने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लाइनमैनों और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
केस-2: मंत्री के सामने किसान ने खोली बिजली व्यवस्था की पोल
इछावर जनपद के ग्राम सेमली जदीद में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत आयोजित शिविर में शुक्रवार को राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के सामने किसान नारायण पटेल ने बिजली आपूर्ति की समस्या उठाई। बताया गया कि मंत्री किसानों को बिजली मिलने की बात कह रहे थे, तभी किसान ने खड़े होकर कहा कि उनके गांव में पिछली रात से बिजली गुल है और दिन में भी आपूर्ति बहाल नहीं हुई थी। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ। शिविर में मंत्री ने नागरिकों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के दावों और उपभोक्ताओं के अनुभवों के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
केस-3: कांग्रेस ने पुतला फूंककर जताया विरोध
जिले में अघोषित बिजली कटौती के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को कोतवाली चौराहे पर विद्युत वितरण कंपनी का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा कि बिजली संकट से किसान, व्यापारी, विद्यार्थी और आम नागरिक परेशान हैं।कांग्रेस ने अघोषित कटौती बंद करने, निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और आवश्यक कटौती की पूर्व सूचना देने की मांग की। पार्टी ने चेतावनी दी कि नवरात्र के दौरान बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोगों को परेशानी उठानी पड़ी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
केस-4: श्यामपुर के हिंगोनी जोड़ पर ग्रामीणों का चक्काजाम
श्यामपुर क्षेत्र के हिंगोनी जोड़ पर लगातार बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीण राम सिंह, मनोहर सिंह सहित अन्य लोगों का कहना था कि अनियमित बिजली आपूर्ति से दैनिक कामकाज और खेती-किसानी प्रभावित हो रही है। चक्काजाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर श्यामपुर पुलिस और विद्युत विभाग के सहायक अभियंता मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया और यातायात बहाल कराया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद विरोध शांत हुआ, लेकिन ग्रामीणों की प्रमुख मांग अघोषित कटौती बंद कर नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
बिजली कंपनी का जवाब: पावर मैनेजमेंट के निर्देश पर बंद हो रहे फीडर
बढ़ते जनाक्रोश के बीच मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की अधीक्षण यंत्री पूनम तुमराम ने कहा कि कंपनी अपनी मर्जी से कटौती नहीं कर रही है। उनके अनुसार, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) का संचालन पावर मैनेजमेंट कंपनी करती है और वहां से निर्देश मिलने पर ग्रामीण कृषि फीडरों की आपूर्ति बंद करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि समस्या केवल सीहोर जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों सहित अनेक जिलों में ऐसी स्थिति बनी हुई है। अधीक्षण यंत्री ने 13 अक्टूबर के बाद सुधार शुरू होने और 15 अक्टूबर तक स्थिति में राहत मिलने की उम्मीद जताई है।