मोहनलालगंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाली प्राचीन सई नदी का जलस्तर बीते दो दिनों से अचानक बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों में हड़कंप मचा है। नदी का पानी खतरे के निशान तक पहुंचने से तीन दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदी का पानी खेतों में घुसने से सैकड़ों बीघे में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों के मुताबिक धान की फसल पकने की कगार पर है। ऐसे में अचानक पानी भरने से फसल गिरने और बर्बाद होने की आशंका है। कई खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण पौध गलने लगी है। रंजीतखेड़ा गांव में ही करीब तीन दर्जन से अधिक किसानों के खेत पानी में डूब गए हैं। जवाहरखेड़ा, चिरानीखेड़ा, मीरानपुर और बरवलिया समेत आसपास के कई गांव भी प्रभावित हैं। किसानों दुर्गेश, रामसहाय, अशोक, मायाराम, सरवन, भरतलाल, दिनेश और बाबूलाल समेत अन्य का कहना है कि धान की फसल ही उनके परिवार की सालभर की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा है। फसल खराब होने पर आर्थिक संकट गहरा सकता है। किसानों ने प्रशासन से तत्काल निरीक्षण, जल निकासी और फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।