मड़ियांव में बुजुर्ग मगन बिहारी तिवारी की हत्या ने पुलिसिंग की कलई खोल दी है। मंगलवार को देर शाम आठ बजे फैजुल्लागंज में हुई प्रबुद्ध वर्ग की बैठक में लोगों ने पुलिस के खुफिया तंत्र और गश्त पर गंभीर सवाल उठाए। सामाजिक कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी ने कहा कि हत्या का आरोपी वांछित होने के बावजूद मड़ियांव थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर वर्षों से रह रहा था। पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं थी। सवाल यह है कि जब थाने के इतने करीब रह रहे वांछित अपराधी की भनक पुलिस को नहीं लगी तो कॉलोनियों और झुग्गियों में छिपकर रह रहे दूसरे अपराधियों का पता कैसे चलेगा? मिल्लत नगर रोड स्थित भूइहारे बाबा ट्रस्ट परिसर में हुई बैठक में मृतक की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। ममता त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर अपनी पीठ थपथपा ली, लेकिन उस परिवार का क्या, जिसने अपना बुजुर्ग खो दिया। उन्होंने कहा कि सपा नेता पूजा शुक्ला ने मामले को मजबूती से नहीं उठाया होता तो घटना का खुलासा भी मुश्किल था। वरिष्ठ समाजसेवी राकेश पांडेय ने संकरे रास्तों पर नो-एंट्री के बावजूद भारी वाहनों के आवागमन का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मी कथित तौर पर सौ-दो सौ रुपये की ऊपरी कमाई के लालच में नियमों की अनदेखी करते हैं। अखिलेश अवस्थी ने नाबालिगों के ई-रिक्शा चलाने पर पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए। बैठक में पूर्व पुलिस अधिकारी चंद्रदेव दुबे, गुड़िया सिंह उपाध्याय, प्रियंका बाजपेई, संतोष कुमार गुप्ता, रमेश चंद्र अवस्थी, राकेश श्रीवास्तव, शैलेंद्र मिश्रा, अभिषेक मिश्र, उदय प्रताप यादव, विष्णु अवस्थी, उज्ज्वल दीक्षित और आदित्य गुप्ता समेत अन्य लोग मौजूद रहे।