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VIDEO: घास मैदान से निकले कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, अभावों में भी पल रहा भारत के लिए खेलने का सपना

(सौरभ मिश्र)। बचपन में ही पिता मो. जमील का साया कब उठ गया, मुझे याद भी नहीं। मां शाहीन होममेड का कार्य कर किसी तरह परिवार का भरण पोषण करती हैं, मुझे बचपन से मोबाइल पर स्पोर्ट्स देखने में रुचि रही। ओलंपियन हरमनप्रीत सिंह, ललित उपाध्याय, भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी मुमताज खान और जूनियर पुरुष हॉकी एशिया कप में भारतीय टीम के कप्तान रहे आमिर अली की हॉकी ने विशेष ध्यान खींचा। इसके बाद केडी सिंह बाबू मेमोरियल सोसाइटी की ओर से नेशनल कॉलेज के घास मैदान पर मुफ्त प्रशिक्षण मिलने लगा। तीन वर्षों से यहां हॉकी की बारीकियां सीख रही हूं। चार स्कूल स्टेट में रजत जीत चुकी हूं, अब बस भारतीय हॉकी खिलाड़ी बनने का सपना पूरा करना है। ऐसा कहना है निशादगंज निवासी आशिका बानो का। आशिका अकेली नहीं हैं। यहां रोज ऐसे कई सपने पसीने के साथ आकार ले रहे हैं। किसी के पिता कार चलाकर परिवार पाल रहे हैं तो किसी की मां घर के साथ छोटे-मोटे काम कर बच्चों की पढ़ाई और जरूरतें पूरी कर रही हैं। सुविधाएं सीमित हैं, लेकिन हौसले बड़े हैं। प्रशिक्षण ले रहे अंडर-14 आयुवर्ग के ये खिलाड़ी यहीं के घास मैदान से निकले शारदा नंदन तिवारी, आमिर अली, शाहरुख अली और मुमताज खान जैसे खिलाड़ियों को देखकर भारतीय टीम की जर्सी पहनने का सपना बुन रहे हैं। अब नजदीक में एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड की दरकार है। सोसाइटी पीआरओ खुरशीद अहमद ने बताया कि ओलंपियन सुजीत कुमार 50 से अधिक बच्चों को हॉकी की बारीकियां सीखा रहे हैं। बच्चों को खेल किट भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास के लिए आसपास एस्ट्रोटर्फ मैदान मिल जाए तो उनकी प्रतिभा को और निखारा जा सकता है। गोलकीपर स्वाति को एस्ट्रोटर्फ का इंतजार गोलकीपर स्वाति शर्मा ने बताया कि मेरे पापा सोनू स्कूल वैन चलाते हैं, मां शिवानी शर्मा गृहणी हैं। सितंबर 2025 में झांसी में हुए स्कूल स्टेट में रजत पदक मिला। अब भारतीय टीम के लिए खेलना चाहती हूं। बेहतर अभ्यास के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान जरूरी है। मुमताज की तरह इंडिया के लिए खेलूंगी अंशिका पांडेय ने बताया कि पिता पवन पांडेय पैथोलॉजी में काम करते हैं, मां क्षमा पांडेय गृहणी हैं। स्कूल स्टेट में रजत पदक जीत चुकी हूं। सोसाइटी की खिलाड़ी रहीं मुमताज खान को आदर्श मानकर उन्हीं की तरह भारतीय टीम की जर्सी पहनना सपना है। कुछ नहीं आता था, अब दो बार नेशनल में रजत वरुण का कहना है कि मेरे पापा रामदास ऑटो चालक, मां पूनम गृहणी हैं। वर्ष 2021 में हॉकी शुरू किया तब अधिक जानकारी नहीं थी। इसके बाद बारीकियां सीख नेशनल चैंपियनशिप में दो बार रजत पदक जीता। अब भारतीय टीम में जगह बनाना लक्ष्य है। मनप्रीत से सीखा थ्रीडी स्किल, ओलंपिक लक्ष्य शुभांशु शुक्ला ने कहा कि मेरे पिता राम कृपाल शुक्ला कार चलाते हैं। भारतीय मिडफील्डर मनप्रीत सिंह को देखकर उनसे थ्रीडी स्किल सीखी। स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर चुका हूं। आगे देश के लिए ओलंपिक पदक जीतना चाहता हूं।

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