गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बदइयां, टिकरी और बह़रौरा गांवों के करीब डेढ़ हजार किसानों की हजारों एकड़ धान, उड़द, बाजरा, सब्जी और चारे की फसल जलमग्न हो गई। शुक्रवार को बाढ़ का पानी घरों के किनारे तक पहुंच गया। ग्रामीण मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। किसान प्रेमचंद, रामकली, भयंकर यादव, गुना कश्यप, मूलचंद और सियावती ने बताया कि बारिश के दौरान उनके कच्चे घर गिर गए। बदइयां के किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता रज्जन आचार्य समेत सुखरानी, नन्हकी, राम आसरे यादव, मधु मौर्या, गोधन, राजाराम, राधे रावत और सुरेश सिंह ने बताया कि गांव की करीब एक हजार एकड़ जमीन पानी में डूब गई है। इससे पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है और जलभराव से बीमारियां फैलने की आशंका है। रिंकू और दिनेश कश्यप के दो तालाबों में पाली गई मछलियां भी बाढ़ के पानी के साथ बह गईं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक प्रशासन की टीम नुकसान का जायजा लेने गांव नहीं पहुंची है। किसानों ने फसलों और अन्य नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। उपजिलाधिकारी अपराजिता आर्यन ने बताया कि टीम भेजकर नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर बाढ़ राहत उपलब्ध कराई जाएगी।