भाजपा ने उत्तर प्रदेश की शिक्षक और स्नातक सीटों पर विधानपरिषद चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन में जातीय गणित पर जोर दिया है। पार्टी ने 11 सीटों में से पांच पर ब्राह्मण चेहरों को उतारने का फैसले लिया है। इसमें सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ उस राजनीतिक बेचैनी को भी शांत करने की कवायद नजर आ रही है, जो यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में दिखाई दे रही है। भाजपा के लिए शिक्षक व स्नातक मतदाता वर्ग में यूजीसी का मुद्दा अहम है, क्योंकि यही वर्ग उच्च शिक्षा व विश्वविद्यालयों से सीधे जुड़ा है। इसके अलावा सवर्ण समाज सियासत में भी उपेक्षा पर लगातार आवाज उठा रहा है। यूजीसी के नए नियमों ने इस आवाज को और तल्ख कर दिया। इसे लेकर युवाओं में बहुत नाराजगी दिख रही है।